सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन: दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा मामला, फोर्स फीडिंग की मांग से बढ़ी बहस

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By: Amit Kumar

On: Wednesday, July 15, 2026 3:31 PM

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। उनकी सेहत लगातार बिगड़ने की खबरों के बीच अब मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिसमें मांग की गई है कि यदि जरूरत पड़े तो वांगचुक को सरकारी अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल निगरानी में रखा जाए और उनकी जान बचाने के लिए आवश्यक लिक्विड न्यूट्रिशन, विटामिन और मिनरल्स दिए जाएं।

भूख हड़ताल के 18वें दिन तक पहुंचने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं इस मामले ने लोकतांत्रिक अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की जिम्मेदारी को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

18वें दिन में पहुंची भूख हड़ताल

सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। लगातार भोजन नहीं लेने के कारण उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने की खबर सामने आई है।

याचिका में दावा किया गया है कि भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका करीब 8.5 किलोग्राम वजन कम हो चुका है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि जल्द चिकित्सा सहायता नहीं मिली तो उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है।

यही वजह है कि अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट में क्या मांग की गई है?

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा करे।

याचिका में मांग की गई है कि यदि डॉक्टरों को लगे कि सोनम वांगचुक की जान खतरे में है, तो उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर लिक्विड न्यूट्रिशन, विटामिन और मिनरल्स देकर उनके शरीर में पोषण की कमी को पूरा करने की भी मांग की गई है।

फोर्स फीडिंग को लेकर क्या है विवाद?

इस याचिका का सबसे चर्चित हिस्सा फोर्स फीडिंग यानी व्यक्ति की इच्छा के बिना चिकित्सकीय पोषण देने की मांग है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की जान खतरे में हो तो सरकार केवल दर्शक बनकर नहीं रह सकती। ऐसे में जीवन बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाना सरकार की जिम्मेदारी है।

हालांकि फोर्स फीडिंग का मुद्दा कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है। एक तरफ व्यक्ति के मौलिक अधिकार और उसकी इच्छा का सम्मान है, वहीं दूसरी तरफ जीवन की रक्षा करना राज्य का दायित्व भी माना जाता है।

इसी वजह से अदालत का फैसला इस मामले में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्वास्थ्य को लेकर जताई गई गंभीर चिंता

याचिका में कहा गया है कि लगातार भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

दावा किया गया है कि उनका वजन लगभग 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने से शरीर में पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसी स्थिति में समय रहते चिकित्सकीय देखभाल जरूरी मानी जाती है ताकि किसी गंभीर स्वास्थ्य संकट से बचा जा सके।

सरकार की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया है कि वह सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर पर्याप्त संवेदनशील नहीं दिखाई दे रही है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा की जिम्मेदारी सरकार को देता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति की जान खतरे में हो तो प्रशासन को उचित कदम उठाने चाहिए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी स्थिति में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी नागरिक की जान केवल इलाज की कमी के कारण न जाए।

लोकतांत्रिक अधिकार और जीवन की सुरक्षा के बीच संतुलन

इस पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी सामने आया है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल का अधिकार कितना व्यापक है।

भारत में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार माना जाता है। कई सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में भूख हड़ताल को विरोध के एक अहिंसक माध्यम के रूप में अपनाया गया है।

लेकिन जब किसी प्रदर्शनकारी की जान को खतरा पैदा होने लगे, तब राज्य की भूमिका क्या होनी चाहिए, यही इस मामले का सबसे बड़ा कानूनी प्रश्न बन गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसी स्थिति में सरकार मूकदर्शक नहीं रह सकती।

सुनवाई पर बार हड़ताल का असर पड़ सकता है

हालांकि इस जनहित याचिका पर तुरंत सुनवाई होगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की हड़ताल के कारण अदालत की नियमित कार्यवाही प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले को कितनी प्राथमिकता देती है और क्या जल्द कोई अंतरिम आदेश जारी किया जाता है।

28 जून से चल रहा है प्रदर्शन

जानकारी के अनुसार सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

प्रदर्शनकारी नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जता रहे हैं।

उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी बताई जा रही है। प्रदर्शन में शामिल लोग परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी उठा रहे हैं।

कई प्रसिद्ध हस्तियों ने की अपील

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए कई प्रमुख हस्तियों ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

इनमें कई विपक्षी नेताओं के अलावा प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह तथा अर्थशास्त्री जयति घोष भी शामिल हैं।

इन सभी ने वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है।

आगे क्या हो सकता है?

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ी नजर दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हुई है।

यदि अदालत याचिका पर सुनवाई करती है तो वह सरकार और संबंधित एजेंसियों से सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य रिपोर्ट मांग सकती है। इसके अलावा मेडिकल बोर्ड गठित करने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने या जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराने जैसे निर्देश भी दिए जा सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर अदालत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाते हुए अपना फैसला दे सकती है।

एक नजर में पूरा मामला

विषयजानकारी
सामाजिक कार्यकर्तासोनम वांगचुक
स्थानजंतर-मंतर, नई दिल्ली
भूख हड़ताल18वें दिन में
प्रदर्शन शुरू28 जून
मुख्य मुद्दानीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का विरोध
प्रमुख मांगकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
हाई कोर्ट में याचिकासरकारी अस्पताल में भर्ती कर मेडिकल निगरानी और जरूरत पड़ने पर लिक्विड न्यूट्रिशन देने की मांग
स्वास्थ्य संबंधी दावालगभग 8.5 किलोग्राम वजन कम होने का दावा
प्रमुख कानूनी प्रश्नजीवन की रक्षा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता
समर्थन और अपीलविपक्षी नेताओं, अरुंधति रॉय, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और जयति घोष सहित कई हस्तियों ने भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की

Amit Kumar

अमित कुमार TajaTimes.com से जुड़े एक समर्पित कंटेंट राइटर और डिजिटल पत्रकार हैं। उन्हें टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, मनोरंजन, वायरल खबरों और ताजा घटनाक्रमों पर लिखने का विशेष अनुभव है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और पाठकों के लिए सहज है,

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