ITR भरते समय भूलकर भी न करें ये 33 बड़ी गलतियां, वरना आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस

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By: Deep Garg

On: Wednesday, June 17, 2026 10:09 AM

ITR सीजन शुरू, लेकिन छोटी गलती बन सकती है बड़ी परेशानी

हर साल करोड़ों लोग अपनी इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करते हैं। पहले जहां यह प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती थी, वहीं अब ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल सुविधाओं की वजह से ITR भरना काफी आसान हो गया है। लेकिन आसान होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। एक छोटी सी चूक भी आपका रिफंड रोक सकती है, आपकी रिटर्न को डिफेक्टिव बना सकती है या फिर इनकम टैक्स विभाग की तरफ से नोटिस आने का कारण बन सकती है।

वित्त वर्ष 2025-26 की ITR भरने वाले सभी टैक्सपेयर्स को कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर आप खुद अपनी रिटर्न भरते हैं या किसी के माध्यम से भरवाते हैं, तब भी इन गलतियों से बचना बेहद जरूरी है।

वित्त वर्ष और असेसमेंट ईयर को लेकर भ्रम न रखें

सबसे पहली गलती जो बहुत से लोग करते हैं, वह है वित्त वर्ष और असेसमेंट ईयर को लेकर भ्रम।

1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक का समय वित्त वर्ष 2025-26 कहलाएगा। इसी अवधि में कमाई गई आय के लिए जो ITR दाखिल होगी उसका असेसमेंट ईयर 2026-27 होगा।

कई बार लोग गलत असेसमेंट ईयर चुन लेते हैं, जिसकी वजह से उनकी रिटर्न में तकनीकी दिक्कतें आ जाती हैं। इसलिए ITR भरने से पहले सही वर्ष का चयन जरूर करें।

हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है

आज के समय में इनकम टैक्स विभाग तकनीक के जरिए आपकी लगभग हर बड़ी वित्तीय गतिविधि पर नजर रखता है।

अगर आपने साल के दौरान 10 लाख रुपये से ज्यादा नकद जमा किया है, बड़ी एफडी कराई है, भारी क्रेडिट कार्ड खर्च किया है, शेयर बाजार में निवेश किया है या कोई महंगी संपत्ति खरीदी है, तो इन सभी की जानकारी विभाग के पास पहुंच जाती है।

AIS और TIS रिपोर्ट में यह सभी लेनदेन दिखाई देते हैं। इसलिए यह सोचना कि विभाग को जानकारी नहीं होगी, एक बड़ी गलती साबित हो सकती है।

किन परिस्थितियों में ITR भरना जरूरी हो जाता है

बहुत से लोग सोचते हैं कि टैक्स नहीं बनता तो ITR भरने की जरूरत नहीं है। लेकिन कई ऐसे मामले हैं जहां ITR भरना अनिवार्य हो जाता है।

अगर आपने विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया है, बिजली का बिल 1 लाख रुपये से ज्यादा है, आपके ऊपर TDS कटा है, सेविंग अकाउंट में 50 लाख रुपये से ज्यादा जमा है या करंट अकाउंट में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा है, तो ITR दाखिल करना जरूरी हो सकता है।

इसके अलावा यदि आपका बिजनेस टर्नओवर 60 लाख रुपये से अधिक है या प्रोफेशनल आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तब भी रिटर्न भरना जरूरी हो जाता है।

ITR की अंतिम तिथि को हल्के में न लें

रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को नजरअंदाज करना सबसे आम लेकिन सबसे महंगी गलतियों में से एक है।

समय पर ITR नहीं भरने से रिफंड में देरी हो सकती है, ब्याज का नुकसान हो सकता है, पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने का विकल्प समाप्त हो सकता है और बिजनेस या शेयर बाजार के नुकसान को आगे के वर्षों में समायोजित करने का अधिकार भी खत्म हो सकता है।

इसके अलावा लेट फीस और ब्याज का अतिरिक्त बोझ भी पड़ सकता है।

बैंक अकाउंट वैलिडेशन की प्रक्रिया जरूर पूरी करें

कई लोग रिटर्न भर देते हैं लेकिन बैंक अकाउंट वैलिडेट करना भूल जाते हैं।

जब तक आपका बैंक अकाउंट वैलिडेट नहीं होगा, तब तक रिफंड आने में समस्या हो सकती है। इसलिए सभी सक्रिय बैंक खातों को पोर्टल पर जोड़ें और रिफंड के लिए एक खाते को नॉमिनेट जरूर करें।

प्री-फिल्ड डेटा को आंख बंद करके स्वीकार न करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर कई जानकारियां पहले से भरी हुई मिलती हैं।

नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, पता, बैंक अकाउंट, सैलरी और ब्याज जैसी जानकारी अक्सर पहले से उपलब्ध होती है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर जानकारी पूरी तरह सही हो।

रिटर्न फाइल करने से पहले हर जानकारी को ध्यान से जांचें और आवश्यकता पड़ने पर सुधार करें।

AIS और TIS रिपोर्ट को ध्यान से देखें

AIS और TIS आपकी टैक्स प्रोफाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

इन रिपोर्टों में बैंक ब्याज, एफडी का ब्याज, शेयर बाजार के लेनदेन, क्रिप्टो इनकम, नकद जमा और अन्य कई प्रकार की जानकारी दिखाई देती है।

अगर आपकी ITR और AIS की जानकारी में बड़ा अंतर पाया जाता है तो विभाग की तरफ से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।

फॉर्म 26AS का मिलान करना न भूलें

फॉर्म 26AS में TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स जैसी महत्वपूर्ण जानकारी होती है।

अगर यहां दर्ज आंकड़े और आपकी ITR में अंतर पाया जाता है तो रिफंड रुक सकता है या टैक्स डिमांड आ सकती है।

इसलिए रिटर्न भरने से पहले फॉर्म 26AS का मिलान जरूर करें।

सभी बैंक खातों की जानकारी सही दें

बहुत से लोग सिर्फ एक बैंक अकाउंट का विवरण देते हैं जबकि उनके नाम पर कई खाते होते हैं।

इनकम टैक्स विभाग PAN के आधार पर खातों की जानकारी ट्रैक कर सकता है। इसलिए सभी बैंक खातों और उनसे जुड़े लेनदेन का सही विवरण देना जरूरी है।

सही ITR फॉर्म का चयन बेहद जरूरी

गलत ITR फॉर्म चुनना एक गंभीर गलती है।

ITR-1 आम वेतनभोगी और ब्याज आय वालों के लिए है। ITR-2 कैपिटल गेन और एक से अधिक संपत्ति रखने वालों के लिए उपयुक्त है। बिजनेस या F&O ट्रेडिंग करने वालों के लिए ITR-3 और प्रिजम्पटिव टैक्सेशन वालों के लिए ITR-4 का उपयोग किया जाता है।

गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न डिफेक्टिव घोषित की जा सकती है।

पूरी आय दिखाना जरूरी है

कई लोग केवल बैंक में प्राप्त आय दिखाते हैं और नकद में प्राप्त आय को छिपा देते हैं।

लेकिन आय चाहे बैंक में आए या नकद में, दोनों स्थितियों में उसका खुलासा करना आवश्यक है। आय छिपाने पर बाद में नोटिस आ सकता है।

गलत हेड में आय दिखाने से बचें

कुछ लोग शेयर बाजार की आय को अन्य स्रोतों की आय में दिखा देते हैं। कुछ लोग कॉन्ट्रैक्ट इनकम को सैलरी के रूप में दिखाने की कोशिश करते हैं।

इस तरह की गलतियां टैक्स नियमों का उल्लंघन मानी जाती हैं और विभागीय जांच का कारण बन सकती हैं।

टैक्स फ्री आय का भी खुलासा करें

कृषि आय, पीपीएफ का ब्याज, सुकन्या समृद्धि योजना का रिटर्न और कुछ कैपिटल गेन टैक्स फ्री हो सकते हैं।

लेकिन टैक्स फ्री होने का मतलब यह नहीं कि उन्हें ITR में दिखाने की जरूरत नहीं है। सही जानकारी देना हमेशा जरूरी होता है।

सेविंग अकाउंट और एफडी के ब्याज को न छिपाएं

बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ब्याज की जानकारी सीधे टैक्स विभाग तक पहुंचती है।

सेविंग अकाउंट ब्याज, एफडी ब्याज और आरडी ब्याज को सही तरीके से घोषित करना जरूरी है। छोटी रकम होने पर भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फर्जी डिडक्शन और रिफंड क्लेम से बचें

कुछ लोग अतिरिक्त रिफंड पाने के लिए फर्जी निवेश दिखा देते हैं या गलत डिडक्शन क्लेम कर लेते हैं।

आज के समय में विभाग के पास डेटा मिलान के लिए अत्याधुनिक सिस्टम मौजूद हैं। इसलिए गलत दावा करना भारी पड़ सकता है।

क्रिप्टो, गेमिंग और लॉटरी आय को न छिपाएं

क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन गेमिंग और लॉटरी से हुई कमाई पर विशेष टैक्स नियम लागू होते हैं।

इन स्रोतों से हुई आय ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध रहती है, इसलिए इन्हें छिपाने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है।

मोबाइल नंबर और ईमेल हमेशा अपडेट रखें

इनकम टैक्स विभाग की अधिकांश सूचनाएं ईमेल और मोबाइल नंबर पर भेजी जाती हैं।

अगर आपकी संपर्क जानकारी पुरानी है तो जरूरी नोटिस या अपडेट मिस हो सकते हैं।

ब्याज आय का दोबारा मिलान करें

AIS देखने के साथ-साथ बैंक द्वारा जारी इंटरेस्ट सर्टिफिकेट भी जरूर जांचें।

कई बार दोनों में अंतर हो सकता है जिसे समय रहते सुधारना जरूरी है।

टैक्स भुगतान का रिकॉर्ड जांचें

TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ असेसमेंट टैक्स की जानकारी को अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

गलत आंकड़े रिफंड में देरी या अतिरिक्त टैक्स डिमांड का कारण बन सकते हैं।

क्लबिंग ऑफ इनकम के नियम समझें

अगर आपने अपनी पत्नी या नाबालिग बच्चे के खाते में पैसा ट्रांसफर किया है और उस पर ब्याज मिल रहा है, तो कुछ परिस्थितियों में वह आय आपकी आय में जोड़ी जा सकती है।

इस नियम को नजरअंदाज करने से टैक्स गणना गलत हो सकती है।

एडवांस टैक्स भरना न भूलें

यदि आपकी टैक्स देनदारी निर्धारित सीमा से अधिक है तो एडवांस टैक्स समय पर भरना जरूरी है।

ऐसा नहीं करने पर ब्याज और जुर्माना देना पड़ सकता है।

GST और ITR के आंकड़ों में सामंजस्य रखें

यदि आपका GST रजिस्ट्रेशन है तो GST रिटर्न और ITR में दिखाई गई आय का मिलान होना चाहिए।

दोनों में बड़ा अंतर विभागीय जांच को आमंत्रित कर सकता है।

शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश का पूरा विवरण दें

शेयर बाजार के सभी लेनदेन रिकॉर्ड में रहते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और डिविडेंड आय का सही विवरण देना जरूरी है। इन जानकारियों को छिपाने से नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।

पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था सोच-समझकर चुनें

हर टैक्सपेयर की स्थिति अलग होती है।

किसी के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था फायदेमंद हो सकती है तो किसी के लिए नई। इसलिए गणना करके सही विकल्प चुनें और समय पर आवश्यक फॉर्म भरें।

रेजिडेंशियल स्टेटस का सही चयन करें

अगर आप लंबे समय तक विदेश में रहे हैं तो आपका टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस बदल सकता है।

रेजिडेंशियल स्टेटस का सीधा असर आपकी टैक्स देनदारी और ITR फॉर्म पर पड़ता है।

ITR को ई-वेरिफाई करना बिल्कुल न भूलें

सिर्फ ITR भरना काफी नहीं है।

जब तक आप उसे ई-वेरिफाई नहीं करते, तब तक रिटर्न पूरी तरह दाखिल नहीं मानी जाती। इसलिए रिटर्न जमा करने के बाद वेरिफिकेशन जरूर पूरा करें।

143(1) इंटिमेशन को ध्यान से पढ़ें

ITR प्रोसेस होने के बाद विभाग की ओर से 143(1) इंटिमेशन जारी किया जाता है।

इसमें बताया जाता है कि रिफंड मिलेगा या नहीं, अतिरिक्त टैक्स देना है या नहीं और कोई गलती पाई गई है या नहीं।

जरूरी दस्तावेज हमेशा सुरक्षित रखें

फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, ITR एक्नॉलेजमेंट, निवेश प्रमाण, ब्रोकर रिपोर्ट और खर्चों से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।

भविष्य में किसी जांच या स्पष्टीकरण के दौरान यही दस्तावेज काम आते हैं।

बिजनेस करने वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

व्यापारियों और प्रोफेशनल्स को खातों का पूरा रिकॉर्ड रखना चाहिए।

खर्चों का सही विवरण, नकद भुगतान की सीमा और ऑडिट संबंधी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

गलती हो जाए तो रिवाइज्ड ITR भरें

अगर रिटर्न भरने के बाद कोई गलती पता चलती है तो घबराने की जरूरत नहीं है।

समय रहते रिवाइज्ड ITR दाखिल करके गलती सुधारी जा सकती है। लेकिन इसे टालना नहीं चाहिए।

प्रोफेशनल सलाह लेने से बच सकती हैं कई समस्याएं

अगर आपकी आय के कई स्रोत हैं, शेयर बाजार में निवेश है, बिजनेस है या विदेशी आय शामिल है, तो किसी अनुभवी टैक्स विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।

टैक्स नियमों की जानकारी लगातार बढ़ाते रहें

टैक्स कानून हर साल बदलते रहते हैं। नई छूट, नए नियम और नई रिपोर्टिंग आवश्यकताओं की जानकारी रखना बेहद जरूरी है।

जो व्यक्ति टैक्स नियमों को समझता है, वह न केवल सही तरीके से ITR भरता है बल्कि भविष्य में नोटिस, जुर्माने और अनावश्यक परेशानियों से भी बचा रहता है।

Deep Garg

Deepak Garg is the founder and editor of TajaTimes.com. He covers technology, business, entertainment, lifestyle, and trending news with a focus on accurate and timely reporting.

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