भारत और इंग्लैंड के बीच खेला गया दूसरा वनडे मुकाबला भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए काफी निराशाजनक रहा। पहले मैच में शानदार जीत दर्ज करने के बाद उम्मीद थी कि टीम इंडिया सीरीज पर कब्जा कर लेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और सीरीज 1-1 की बराबरी पर पहुंच गई। अब दोनों टीमों के बीच निर्णायक मुकाबला लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला जाएगा।
इस हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा टीम इंडिया की बल्लेबाजी, गेंदबाजी, टीम चयन और कोचिंग रणनीति को लेकर हो रही है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जीत की स्थिति में पहुंची भारतीय टीम मुकाबला कैसे गंवा बैठी।
जो रूट ने अकेले दम पर पलट दिया मैच
इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े हीरो अनुभवी बल्लेबाज जो रूट रहे। जब इंग्लैंड मुश्किल स्थिति में नजर आ रहा था तब उन्होंने बेहद संयम और समझदारी से बल्लेबाजी की। रूट ने नाबाद 99 रन की शानदार पारी खेली और टीम को जीत तक पहुंचा दिया।
उनकी इस पारी में शानदार टाइमिंग, बेहतरीन शॉट चयन और अनुभव साफ दिखाई दिया। भारतीय गेंदबाज लगातार विकेट लेने की कोशिश करते रहे लेकिन रूट ने हर चुनौती का जवाब धैर्य के साथ दिया।
रूट शतक से केवल एक रन दूर रह गए, लेकिन उनकी पारी किसी शतक से कम नहीं मानी जा रही। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यही पारी मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
भारत की बल्लेबाजी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी
भारतीय टीम की शुरुआत ठीक रही थी। विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने अर्धशतक लगाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों बल्लेबाजों ने 65-65 रन बनाए और ऐसा लग रहा था कि भारत बड़ा स्कोर खड़ा करेगा।
लेकिन जैसे ही ये दोनों बल्लेबाज आउट हुए, पूरी बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। मध्यक्रम पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। निचले क्रम के बल्लेबाज भी ज्यादा देर टिक नहीं सके और टीम निर्धारित 50 ओवर भी नहीं खेल सकी।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि अगर भारत पूरे 50 ओवर खेल लेता तो स्कोर काफी बड़ा हो सकता था और मुकाबले का परिणाम भी अलग हो सकता था।
मध्यक्रम ने बढ़ाई टीम इंडिया की चिंता
इस मुकाबले में सबसे बड़ी निराशा भारतीय मध्यक्रम रहा। ईशान किशन, शिवम दुबे, अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर से काफी उम्मीदें थीं लेकिन कोई भी बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सका।

कई बल्लेबाज छोटी गेंदों के सामने संघर्ष करते नजर आए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने लगातार शॉर्ट बॉल का इस्तेमाल किया और भारतीय बल्लेबाज उसी जाल में फंसते चले गए।
बार-बार एक जैसी गलती दोहराना भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय बन गया है। अगर यही कमजोरी आगे भी बनी रही तो आने वाले बड़े टूर्नामेंटों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
गेंदबाजी ने भी निराश किया
भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती सफलता जरूर दिलाई थी। एक समय इंग्लैंड की टीम दबाव में दिखाई दे रही थी, लेकिन इसके बाद गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाए नहीं रख सके।
जो रूट ने एक छोर संभाले रखा जबकि दूसरे बल्लेबाजों ने उनका अच्छा साथ दिया। डेथ ओवरों में भारतीय गेंदबाज विकेट लेने में नाकाम रहे और इंग्लैंड ने लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया।
जसप्रीत बुमराह ने पूरी कोशिश की लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कई मौकों पर गेंदबाज सही लाइन और लेंथ से भटकते नजर आए।
टीम चयन पर उठे गंभीर सवाल
हार के बाद सबसे ज्यादा चर्चा टीम चयन को लेकर हो रही है। कई पूर्व क्रिकेटरों और फैंस का मानना है कि कुलदीप यादव और अर्शदीप सिंह जैसे गेंदबाजों को मौका मिलना चाहिए था।
वॉशिंगटन सुंदर को टीम में शामिल किया गया लेकिन वह गेंदबाजी में भी ज्यादा योगदान नहीं दे सके। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि उनसे पूरे कोटे के ओवर नहीं कराने थे तो किसी विशेषज्ञ गेंदबाज को मौका देना बेहतर विकल्प हो सकता था।
इसी तरह बल्लेबाजी क्रम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ईशान किशन को ऊपर भेजने के फैसले पर भी काफी बहस देखने को मिली।
गौतम गंभीर की रणनीति चर्चा में
टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर की रणनीति भी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले कुछ मुकाबलों में टीम चयन और खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर कई फैसलों पर सवाल उठे हैं।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार प्रयोग करने से टीम का संतुलन बिगड़ रहा है। बड़े मुकाबलों में स्पष्ट रणनीति और स्थिर टीम संयोजन बेहद जरूरी होता है।
फैंस का कहना है कि जीत के बाद भी टीम की कमजोरियों पर काम करना जरूरी था, लेकिन वही गलतियां दूसरे मुकाबले में फिर दिखाई दीं।
रोहित शर्मा की रिटायरमेंट की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
इस मुकाबले के बाद एक और चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि रोहित शर्मा के वनडे भविष्य को लेकर जल्द बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
हालांकि अभी तक भारतीय क्रिकेट बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस विषय पर लगातार बहस चल रही है।
कई फैंस का मानना है कि टीम की हार का जिम्मेदार किसी एक खिलाड़ी को नहीं ठहराया जा सकता। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि टीम में बड़े बदलाव की जरूरत है।
विराट कोहली और श्रेयस अय्यर ने दिखाई जिम्मेदारी
हालांकि टीम इंडिया मुकाबला हार गई लेकिन विराट कोहली और श्रेयस अय्यर की बल्लेबाजी ने जरूर प्रभावित किया।
दोनों बल्लेबाजों ने मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की। अगर मध्यक्रम उनका साथ देता तो भारत कहीं बड़ा स्कोर बना सकता था।
इन दोनों खिलाड़ियों की फॉर्म भारतीय टीम के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
इंग्लैंड ने दिखाया शानदार संयम
इंग्लैंड की टीम ने लक्ष्य का पीछा करते समय घबराहट नहीं दिखाई। शुरुआती विकेट गिरने के बावजूद खिलाड़ियों ने धैर्य बनाए रखा।
जो रूट ने पूरे रन चेज़ को नियंत्रित किया और बाकी बल्लेबाजों ने जरूरत के मुताबिक उनका साथ दिया। यही वजह रही कि इंग्लैंड ने मैच पर धीरे-धीरे पकड़ मजबूत कर ली।
यह जीत इंग्लैंड के आत्मविश्वास को भी काफी बढ़ाएगी क्योंकि पहले मुकाबले में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
अब लॉर्ड्स में होगा सीरीज का फैसला
दो मैचों के बाद सीरीज अब 1-1 की बराबरी पर है। ऐसे में तीसरा मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद अहम हो गया है।
भारतीय टीम को निर्णायक मुकाबले से पहले अपनी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और टीम संयोजन पर गंभीरता से काम करना होगा। खासकर मध्यक्रम की कमजोरी और डेथ ओवरों की गेंदबाजी में सुधार करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी जीत से उत्साहित होकर मैदान में उतरेगा और घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेगा। ऐसे में क्रिकेट फैंस को लॉर्ड्स में एक रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला मुकाबला देखने को मिल सकता है।












