अब जेब में आएंगे प्लास्टिक के नोट! RBI की बड़ी तैयारी, जानिए कब और कैसे होगा बदलाव

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By: Amit Kumar

On: Saturday, July 18, 2026 8:19 PM

भारत में करेंसी को लेकर जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जिस कागज के नोट को हम वर्षों से अपनी जेब में रखते आए हैं, उसकी जगह भविष्य में प्लास्टिक के नोट यानी पॉलीमर नोट ले सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए प्लास्टिक शीट की सप्लाई के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है, जहां प्लास्टिक करेंसी का इस्तेमाल किया जाता है।

यह बदलाव केवल नोट की सामग्री बदलने तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे आम लोगों की सुविधा, सरकार का खर्च और नकली नोटों पर रोक लगाने जैसे कई बड़े फायदे भी जुड़ सकते हैं।

RBI ने प्लास्टिक नोटों की तैयारी शुरू की

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में भारतीय करेंसी नोटों के लिए पॉलीमर शीट की खरीद और सप्लाई के लिए वैश्विक टेंडर जारी किया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि RBI अब प्लास्टिक नोटों को लेकर गंभीरता से काम कर रहा है।

पिछले महीने RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी कहा था कि केंद्रीय बैंक पॉलीमर नोटों के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्लास्टिक नोट कब से जारी किए जाएंगे और शुरुआत किन-किन मूल्य वर्ग के नोटों से होगी।

आखिर क्या होते हैं पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के मजबूत प्लास्टिक से तैयार किए जाते हैं। देखने और छूने में ये सामान्य कागज के नोटों जैसे ही लगते हैं, लेकिन इनकी मजबूती कई गुना अधिक होती है।

इन नोटों को इस तरह तैयार किया जाता है कि ये लंबे समय तक खराब न हों। यही वजह है कि दुनिया के कई देशों ने पारंपरिक कागज के नोटों की जगह पॉलीमर नोटों को अपनाया है।

प्लास्टिक नोटों के प्रमुख फायदे

प्लास्टिक नोटों को अपनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनकी मजबूती और लंबी उम्र है।

जल्दी नहीं फटेंगे

कागज के नोट अक्सर मुड़ने, बार-बार इस्तेमाल होने या जेब में रखने से फट जाते हैं। प्लास्टिक नोट इस समस्या से काफी हद तक बचाते हैं।

पानी से नहीं होंगे खराब

बरसात के मौसम में अक्सर नोट भीग जाते हैं और खराब हो जाते हैं। पॉलीमर नोट पूरी तरह वाटरप्रूफ होते हैं, इसलिए पानी का इन पर कोई खास असर नहीं पड़ता।

लंबे समय तक चलेंगे

इनकी उम्र सामान्य कागज के नोटों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। इसका मतलब है कि एक ही नोट लंबे समय तक बाजार में चलता रहेगा।

साफ-सफाई बनाए रखना आसान

प्लास्टिक नोटों पर गंदगी कम जमती है और इन्हें साफ रखना भी आसान होता है। इससे नोट ज्यादा समय तक नए जैसे दिखाई देते हैं।

आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?

अगर भारत में प्लास्टिक नोट लागू होते हैं तो इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा।

अब लोगों को नोट फटने या बारिश में खराब होने की चिंता कम रहेगी। जेब, पर्स या बैग में रखने के दौरान नोट जल्दी खराब नहीं होंगे।

दुकानदारों को भी कटे-फटे नोट लेने से बचने की परेशानी कम होगी। बैंक में नोट बदलवाने की आवश्यकता भी पहले की तुलना में काफी घट सकती है।

RBI का करोड़ों रुपये का खर्च होगा कम

हर साल भारतीय रिजर्व बैंक को बड़ी संख्या में खराब और फटे हुए नोट वापस मिलते हैं।

इन नोटों को नष्ट करना पड़ता है और उनकी जगह नए नोट छापने पड़ते हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।

अगर पॉलीमर नोट लंबे समय तक चलते हैं तो नए नोटों की छपाई कम करनी पड़ेगी। इससे सरकार और RBI दोनों का खर्च काफी कम हो सकता है।

खराब नोटों की बड़ी चुनौती

भारत जैसे विशाल देश में हर दिन करोड़ों करेंसी नोट लोगों के हाथों से गुजरते हैं।

बार-बार इस्तेमाल होने के कारण नोट जल्दी पुराने हो जाते हैं। कई बार वे इतने खराब हो जाते हैं कि उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

इसी वजह से RBI को हर साल बड़ी मात्रा में पुराने नोटों को वापस लेकर नष्ट करना पड़ता है।

नकली नोटों पर भी लग सकती है रोक

प्लास्टिक नोटों का एक बड़ा फायदा यह भी माना जाता है कि इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर आसानी से जोड़े जा सकते हैं।

इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष सुरक्षा स्ट्रिप, माइक्रो प्रिंटिंग और अन्य हाई सिक्योरिटी तकनीकें शामिल की जा सकती हैं।

ऐसे सुरक्षा फीचर नकली नोट तैयार करने वालों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इससे बाजार में फर्जी करेंसी की संख्या कम होने की संभावना बढ़ सकती है।

क्या पुराने नोट तुरंत बंद हो जाएंगे?

फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि प्लास्टिक नोट आते ही कागज के सभी नोट बंद कर दिए जाएंगे।

संभावना यही है कि शुरुआत में दोनों प्रकार के नोट साथ-साथ चलेंगे। धीरे-धीरे पुराने नोटों की जगह नए पॉलीमर नोट बाजार में आते जाएंगे।

ऐसी प्रक्रिया दुनिया के कई देशों में पहले भी अपनाई जा चुकी है।

किन मूल्य वर्ग के नोट पहले आएंगे?

RBI ने अभी तक यह जानकारी साझा नहीं की है कि शुरुआत किन नोटों से होगी।

संभावना जताई जा रही है कि पहले छोटे मूल्य वर्ग के नोटों पर प्रयोग किया जा सकता है क्योंकि उनका इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है और वे जल्दी खराब भी होते हैं।

हालांकि अंतिम फैसला RBI की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

दुनिया के किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट?

आज दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों ने पॉलीमर नोटों को अपनाया हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, सिंगापुर सहित लगभग 45 देशों में प्लास्टिक करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इन देशों के अनुभव बताते हैं कि पॉलीमर नोट लंबे समय तक टिकते हैं और रखरखाव का खर्च भी कम होता है।

दुनिया में सबसे पहले किस देश ने शुरू किए प्लास्टिक नोट?

प्लास्टिक नोटों की शुरुआत सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1988 में की थी।

उस समय नकली नोटों की समस्या को रोकने और करेंसी की उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था।

ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग इतना सफल रहा कि धीरे-धीरे दूसरे देशों ने भी इसे अपनाना शुरू कर दिया।

आज ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह पॉलीमर करेंसी का उपयोग करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है।

भारत में पॉलीमर नोट लागू होने की संभावित वजहें

भारत में हर दिन करोड़ों नोटों का लेनदेन होता है। ऐसे में करेंसी जल्दी खराब होना स्वाभाविक है।

यदि पॉलीमर नोट लागू होते हैं तो—

  • नोट ज्यादा समय तक चलेंगे।
  • छपाई का खर्च घटेगा।
  • नकली नोटों पर नियंत्रण आसान होगा।
  • लोगों को फटे नोटों की परेशानी कम होगी।
  • बैंकों पर नोट बदलने का दबाव घट सकता है।

मोहम्मद बिन तुगलक का करेंसी प्रयोग

भारतीय इतिहास में करेंसी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा भी मिलता है।

करीब 700 वर्ष पहले दिल्ली सल्तनत के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने चांदी के महंगे सिक्कों की जगह तांबे और पीतल के सिक्के चलाने का फैसला किया।

उन्होंने इन तांबे और पीतल के सिक्कों का मूल्य चांदी के सिक्कों के बराबर घोषित कर दिया।

शुरुआत में यह फैसला काफी अलग और नया माना गया, लेकिन जल्द ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी सामने आ गई।

क्यों असफल हो गया यह प्रयोग?

उस समय सिक्कों की सुरक्षा के आधुनिक साधन मौजूद नहीं थे।

लोगों ने अपने घरों में ही तांबे और पीतल के नकली सिक्के बनाना शुरू कर दिए।

सरकारी और नकली सिक्कों में अंतर करना मुश्किल हो गया। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

आखिरकार मोहम्मद बिन तुगलक को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

इतिहासकार इस प्रयोग को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक असफलताओं में से एक मानते हैं।

क्यों कहा जाता था मैड मोनार्क?

मोहम्मद बिन तुगलक कई बड़े फैसले अचानक ले लेते थे।

राजधानी बदलना, नई मुद्रा लागू करना और कई अन्य योजनाएं बिना पर्याप्त तैयारी के लागू की गईं।

इन्हीं कारणों से बाद में उन्हें “मैड मोनार्क” यानी पागल बादशाह भी कहा जाने लगा।

हालांकि इतिहासकारों का मानना है कि उनके कई विचार समय से काफी आगे थे, लेकिन सही योजना और व्यवस्था के अभाव में वे सफल नहीं हो सके।

दुनिया की पहली पेपर करेंसी कहां शुरू हुई?

अधिकांश लोग मानते हैं कि यूरोप आधुनिक बैंकिंग और करेंसी का केंद्र रहा है, लेकिन कागज के नोटों की शुरुआत वहां नहीं हुई थी।

दुनिया की पहली पेपर करेंसी चीन में जारी की गई थी।

सोंग राजवंश के दौरान 11वीं सदी में पहली बार कागज के नोटों का इस्तेमाल शुरू हुआ।

उस समय व्यापार तेजी से बढ़ रहा था और भारी धातु के सिक्के ले जाना कठिन था। इसी समस्या का समाधान करने के लिए कागज की मुद्रा शुरू की गई।

यूरोप में कब शुरू हुई पेपर करेंसी?

चीन के लगभग 600 वर्ष बाद यूरोप में कागज की मुद्रा का इस्तेमाल शुरू हुआ।

17वीं सदी के दौरान यूरोप के कई देशों ने धीरे-धीरे पेपर करेंसी को अपनाना शुरू किया।

इसके बाद बैंकिंग व्यवस्था विकसित हुई और आधुनिक मुद्रा प्रणाली की नींव मजबूत होती चली गई।

प्लास्टिक नोट और कागज के नोट में अंतर

विशेषताकागज के नोटप्लास्टिक (पॉलीमर) नोट
मजबूतीजल्दी फट सकते हैंकाफी मजबूत और टिकाऊ
पानी का असरभीगकर खराब हो सकते हैंवाटरप्रूफ
उपयोग अवधिकमकई गुना अधिक
सफाईजल्दी गंदे होते हैंआसानी से साफ रहते हैं
नकली नोट रोकथामसीमित सुरक्षाआधुनिक सुरक्षा फीचर जोड़ना आसान
छपाई का खर्चबार-बार छपाई की जरूरतलंबे समय में खर्च कम

आगे क्या रहेगा सबसे अहम?

फिलहाल RBI ने केवल प्लास्टिक शीट की खरीद से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की है। इसका मतलब यह नहीं है कि अगले ही दिन बाजार में प्लास्टिक नोट दिखाई देने लगेंगे।

आने वाले समय में RBI की ओर से यह स्पष्ट किया जाएगा कि पॉलीमर नोट कब जारी होंगे, किन मूल्य वर्गों में आएंगे और इन्हें चरणबद्ध तरीके से कैसे लागू किया जाएगा। यदि यह योजना सफल रहती है, तो भारत की करेंसी व्यवस्था में यह पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

Amit Kumar

अमित कुमार TajaTimes.com से जुड़े एक समर्पित कंटेंट राइटर और डिजिटल पत्रकार हैं। उन्हें टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, मनोरंजन, वायरल खबरों और ताजा घटनाक्रमों पर लिखने का विशेष अनुभव है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और पाठकों के लिए सहज है,

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