भारतीय फिल्म और थिएटर जगत के लिए जुलाई की शुरुआत बेहद दुखद रही। मराठी रंगमंच की दिग्गज अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता विजय मेहता का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही थिएटर और फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई। कलाकारों, निर्देशकों, रंगकर्मियों और प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
बताया जा रहा है कि विजय मेहता लंबे समय से बीमार थीं। 30 जून की रात उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके जाने से भारतीय रंगमंच ने अपनी सबसे मजबूत और प्रेरणादायक आवाजों में से एक को खो दिया है।
थिएटर जगत में ‘बाई’ के नाम से थीं मशहूर
विजय मेहता को थिएटर की दुनिया में प्यार से ‘बाई’ कहा जाता था। यह केवल एक संबोधन नहीं था, बल्कि उनके प्रति सम्मान, विश्वास और स्नेह का प्रतीक था। उन्होंने अपने जीवन में केवल शानदार नाटक ही प्रस्तुत नहीं किए, बल्कि अनेक कलाकारों को अभिनय और निर्देशन की बारीकियां भी सिखाईं।
उनकी सोच, मंच पर कहानी कहने का तरीका और थिएटर को देखने का नजरिया बेहद अलग था। यही कारण है कि कई पीढ़ियों के अभिनेता और निर्देशक उन्हें अपना गुरु मानते रहे। उन्होंने भारतीय थिएटर को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निधन की खबर से फिल्म और थिएटर जगत में शोक
विजय मेहता के निधन की जानकारी मिलते ही सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया। देशभर के कलाकारों और रंगकर्मियों ने उन्हें याद करते हुए भावुक संदेश साझा किए।
अभिनेता अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विजय मेहता भारत की सबसे महान थिएटर हस्तियों में से एक थीं। उन्होंने उन्हें एक शानदार फिल्म निर्माता, बेहतरीन कलाकार और बेहद प्रेरणादायक इंसान बताया। अनुपम खेर ने कहा कि उनके निधन से कला जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
वहीं अभिनेता और रंगकर्मी विजय केनकरे ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विजय मेहता केवल उनकी गुरु नहीं थीं, बल्कि उनके जीवन का एक अहम हिस्सा थीं। उनके साथ बिताए गए पल हमेशा याद रहेंगे।
कई कलाकारों की गुरु थीं विजय मेहता
विजय मेहता ने अपने लंबे करियर में अनगिनत कलाकारों को मंच पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कहा जाता है कि मशहूर अभिनेता नाना पाटेकरके अभिनय को निखारने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उनके निर्देशन और प्रशिक्षण की शैली बेहद अनुशासित और प्रभावशाली मानी जाती थी। जो भी कलाकार उनके साथ काम करता था, वह अभिनय की नई समझ और आत्मविश्वास लेकर निकलता था। यही वजह है कि उनके जाने का दुख केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे रंगमंच परिवार को गहराई से महसूस हो रहा है।
गुजरात से मुंबई तक का प्रेरणादायक सफर
विजय मेहता का जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात में हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने थिएटर के दो बड़े नाम इब्राहिम अलकाजी और आदि मर्जबान से अभिनय और निर्देशन का प्रशिक्षण लिया।
इसी प्रशिक्षण ने उनके भीतर एक ऐसे रंगकर्मी को जन्म दिया जिसने आगे चलकर भारतीय थिएटर की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने करियर में प्रयोगधर्मी रंगमंच को नई पहचान दिलाई और कई यादगार प्रस्तुतियां दीं।
रंगायन थिएटर ग्रुप से मिली नई पहचान
1960 के दशक में विजय मेहता ने विजय तेंदुलकर, डॉ. श्रीराम लागू और अरविंद देशपांडे जैसे दिग्गज रंगकर्मियों के साथ मिलकर रंगायन थिएटर ग्रुप की स्थापना की।
इस संस्था ने भारतीय थिएटर में नए प्रयोगों और आधुनिक सोच को बढ़ावा दिया। रंगायन के मंच पर प्रस्तुत किए गए नाटकों ने दर्शकों को समाज, राजनीति और मानवीय रिश्तों को नए नजरिए से देखने का अवसर दिया। विजय मेहता की पहचान एक ऐसे निर्देशक के रूप में बनी जो हर प्रस्तुति में कुछ नया करने का साहस रखती थीं।
फिल्मों में भी छोड़ी अमिट छाप
थिएटर के साथ-साथ विजय मेहता ने फिल्मों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। अभिनेत्री के रूप में उन्होंने ‘कलयुग’ और ‘पार्टी’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीता।
निर्देशक के तौर पर भी उन्होंने कई यादगार फिल्में बनाईं। ‘राव साहब’ और ‘पेस्तोनजी’ जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि वे केवल रंगमंच तक सीमित नहीं थीं, बल्कि सिनेमा की भाषा पर भी उनकी मजबूत पकड़ थी। उनकी फिल्मों में संवेदनशील विषयों को गहराई और सादगी के साथ प्रस्तुत किया गया।
छह दशक के करियर में मिले कई बड़े सम्मान
करीब छह दशक से अधिक लंबे करियर में विजय मेहता को देश और विदेश में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। भारतीय रंगमंच और सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, एशिया पैसिफिक फिल्म फेस्टिवल सम्मान, टैगोर रत्न और लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड सहित अनेक सम्मानों से नवाजा गया।
ये पुरस्कार केवल उनकी उपलब्धियों का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति के प्रति उनके समर्पण की भी पहचान हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जताया शोक
विजय मेहता के निधन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने अपने संदेश में विजय मेहता के भारतीय थिएटर और सिनेमा में दिए गए अमूल्य योगदान को याद करते हुए उनके परिवार, शुभचिंतकों और कला जगत के लोगों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विजय मेहता ने भारतीय रंगमंच को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।







