थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जननायकन‘ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा चल रही थी। रिलीज में हुई देरी, राजनीतिक विवाद, विजय के राजनीतिक सफर और इसे उनके फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जाना, इन सभी वजहों से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। फिल्म का पहला शो शुरू होते ही थिएटरों में ऐसा माहौल बना जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं बल्कि थलापति विजय के करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक इमोशनल विदाई भी बन गई है। हालांकि फिल्म में कई कमियां भी हैं, लेकिन फैंस के लिए यह अनुभव किसी त्योहार से कम नहीं है।
| फिल्म | जननायकन |
|---|---|
| मुख्य अभिनेता | थलापति विजय |
| मुख्य विलेन | बॉबी देओल |
| अभिनेत्री | पूजा हेगड़े |
| शैली | एक्शन, ड्रामा, पॉलिटिकल |
| अवधि | लगभग 3 घंटे |
| खास बात | विजय के करियर की आखिरी फिल्म |
रिलीज से पहले विवादों में रही फिल्म
जननायकन की रिलीज से पहले लगातार यह चर्चा होती रही कि फिल्म को कई महीनों तक रिलीज नहीं होने दिया गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तरह-तरह की बातें सामने आती रहीं। फिल्म के राजनीतिक विषय और कुछ संवादों को लेकर काफी बहस देखने को मिली।
यही वजह रही कि जब फिल्म आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंची तो दर्शकों की उत्सुकता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी थी। पहले ही दिन कई जगह थिएटरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं और एडवांस बुकिंग के मामले में फिल्म ने शानदार प्रदर्शन किया।
पहले ही सीन से बन जाता है माहौल
फिल्म की शुरुआत बेहद दमदार तरीके से होती है। शुरुआती कुछ मिनटों में ही यह साफ हो जाता है कि निर्देशक ने कहानी को पूरी तरह मास ऑडियंस के हिसाब से तैयार किया है।
जैसे ही थलापति विजय की पहली एंट्री होती है, थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है। कई जगह दर्शक फिल्म देखने से ज्यादा अपने पसंदीदा स्टार का जश्न मनाते नजर आए। यही वजह है कि इस फिल्म का थिएटर एक्सपीरियंस काफी अलग महसूस होता है।
थलापति विजय बने ‘सुपरमैन’

फिल्म में विजय के किरदार को कई बार ‘सुपरमैन’ कहा जाता है। हालांकि यह कोई सुपरहीरो फिल्म नहीं है, लेकिन उनके किरदार को बेहद ताकतवर और जनता के लिए लड़ने वाले इंसान के रूप में पेश किया गया है।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी मजबूत दिखाई गई है कि छोटे-छोटे इशारों पर भी थिएटर में दर्शकों का जबरदस्त रिएक्शन देखने को मिलता है। कई सीन ऐसे हैं जहां सिर्फ विजय के स्क्रीन पर आने भर से पूरा माहौल बदल जाता है।
कहानी का भावनात्मक पक्ष
फिल्म केवल एक्शन पर आधारित नहीं है। इसकी कहानी का सबसे भावुक हिस्सा एक छोटी बच्ची से जुड़ा हुआ है।
उस बच्ची के माता-पिता का सपना था कि वह बड़ी होकर सेना की वर्दी पहने। हालात ऐसे बनते हैं कि इस अधूरे सपने को पूरा करने की जिम्मेदारी विजय के किरदार पर आ जाती है।
यहीं से कहानी में भावनात्मक मोड़ आता है और दर्शकों को एक अलग तरह का अनुभव मिलता है। बच्ची और विजय के बीच बनने वाला रिश्ता फिल्म की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक माना जा सकता है।
विजय के किरदार की सीक्रेट बैक स्टोरी
फिल्म धीरे-धीरे विजय के अतीत का खुलासा करती है। शुरुआत में उनका किरदार जितना सीधा-सादा दिखाई देता है, आगे चलकर पता चलता है कि उनका अतीत काफी रहस्यमय रहा है।
फ्लैशबैक के जरिए कई बड़े एक्शन सीक्वेंस दिखाए गए हैं। इन दृश्यों में खून-खराबा और हिंसा काफी ज्यादा है, जिसकी वजह से फिल्म को एडल्ट सर्टिफिकेट भी मिला है।
इन फ्लैशबैक सीन में विजय का एक अलग ही अवतार देखने को मिलता है जो फैंस को काफी पसंद आएगा।
बॉबी देओल का दमदार विलेन अवतार
फिल्म में बॉबी देओल मुख्य विलेन की भूमिका निभा रहे हैं। उनका किरदार स्टाइलिश होने के साथ-साथ बेहद खतरनाक भी दिखाया गया है।
कहानी के अनुसार वह इतना प्रभावशाली व्यक्ति है कि सरकार तक को चुनौती देने की ताकत रखता है।
हालांकि स्क्रीन टाइम के लिहाज से बॉबी देओल का किरदार अच्छा है, लेकिन फिल्म पूरी तरह विजय के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। इस वजह से कई बार विलेन उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाता जितनी उम्मीद की जाती है।
पूजा हेगड़े का सीमित रोल
फिल्म में पूजा हेगड़े भी नजर आती हैं लेकिन उनका किरदार काफी छोटा है।
उनकी एंट्री के साथ फिल्म में हल्का रोमांटिक ट्रैक जोड़ने की कोशिश की गई है, लेकिन यह कहानी पर ज्यादा असर नहीं डालता।
ज्यादातर समय पूजा हेगड़े गानों तक ही सीमित दिखाई देती हैं। ऐसे में जो दर्शक उनके बड़े रोल की उम्मीद कर रहे थे, उन्हें थोड़ी निराशा हो सकती है।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर भी फोकस
फिल्म के दूसरे हिस्से में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान जैसे विषयों को भी जगह दी गई है।
कहानी में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध, जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को भावनात्मक अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है।
यह हिस्सा फिल्म को सिर्फ एक्शन फिल्म बनने से रोकता है और इसमें सामाजिक संदेश जोड़ने का प्रयास करता है।
गानों का इस्तेमाल अलग अंदाज में
जननायकन में गानों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन जहां भी गाने आते हैं वहां उनका मकसद कहानी को आगे बढ़ाने से ज्यादा फैंस को सेलिब्रेशन का मौका देना है।
कई गानों में विजय का स्टारडम पूरी तरह दिखाई देता है। डांस, स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस मिलकर थिएटर में अलग ही माहौल बना देते हैं।
हंटर वाला सीन बना सबसे बड़ा मास मोमेंट
फिल्म का सबसे चर्चित सीन वह माना जा रहा है जब विजय के हाथ में हंटर आता है।
इस पूरे सीक्वेंस को बेहद स्टाइलिश तरीके से फिल्माया गया है और थिएटर में दर्शकों का सबसे ज्यादा रिएक्शन भी इसी हिस्से पर देखने को मिलता है।
यही सीन फिल्म के सबसे बड़े मास एंटरटेनमेंट मोमेंट्स में शामिल हो जाता है।
राजनीतिक संवादों ने खींचा ध्यान
फिल्म के कई संवाद सीधे राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते दिखाई देते हैं।
कुछ डायलॉग ऐसे हैं जो वर्तमान राजनीतिक माहौल की याद दिलाते हैं। यही वजह है कि रिलीज से पहले इस फिल्म को लेकर काफी चर्चाएं होती रहीं।
हालांकि फिल्म किसी एक पक्ष का प्रचार करती हुई नजर नहीं आती, लेकिन कई दृश्य राजनीतिक बहस को जरूर जन्म देते हैं।
फ्लैशबैक में दिखाई गई पुरानी कहानी
दूसरे हाफ में लगातार फ्लैशबैक के जरिए विजय के पुराने जीवन को विस्तार से दिखाया जाता है।
इन दृश्यों में उनका संघर्ष, लड़ाइयां और उनके व्यक्तित्व के पीछे की वजह समझाने की कोशिश की गई है।
हर फ्लैशबैक के साथ विजय की एंट्री को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दर्शकों का उत्साह बना रहे।
फिल्म पूरी तरह ओरिजिनल नहीं लगती
फिल्म देखते समय कई जगह ऐसा महसूस होता है कि कुछ दृश्य पहले भी किसी दूसरी फिल्म में देखे जा चुके हैं।
कई सीन और कहानी के कुछ हिस्से परिचित लगते हैं। खासकर महिलाओं से जुड़े कुछ ट्रैक और क्लाइमेक्स में समानता महसूस होती है।
हालांकि फिल्म इन बातों को छिपाने की कोशिश नहीं करती और कई जगह इसे सम्मान के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वीएफएक्स सबसे कमजोर कड़ी
अगर फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी की बात करें तो वह इसके विजुअल इफेक्ट्स हैं।
इतने बड़े बजट की फिल्म होने के बावजूद कई वीएफएक्स सीन कमजोर नजर आते हैं।
खास तौर पर रोबोट वाला सीक्वेंस दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाता। कई जगह ऐसा लगता है जैसे वीडियो गेम का दृश्य चल रहा हो। इस वजह से एक्शन का असर भी थोड़ा कम हो जाता है।
एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस में विजय का दबदबा
फिल्म में कहानी, वीएफएक्स और कुछ तकनीकी कमियां जरूर हैं लेकिन जब भी विजय स्क्रीन पर आते हैं तो दर्शकों का पूरा ध्यान उन्हीं पर चला जाता है।
उनकी एंट्री, डायलॉग डिलीवरी, बॉडी लैंग्वेज और मास अपील फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है।
यही वजह है कि कई कमियों के बावजूद दर्शक फिल्म से जुड़े रहते हैं।
थिएटर एक्सपीरियंस है सबसे बड़ी ताकत
जननायकन को सिर्फ एक फिल्म की तरह देखना शायद सही नहीं होगा।
यह उन लोगों के लिए एक सेलिब्रेशन है जिन्होंने वर्षों तक थलापति विजय को बड़े पर्दे पर देखा है। थिएटर में दर्शकों का उत्साह, सीटियां, तालियां और हर एंट्री पर होने वाला शोर इस फिल्म को अलग अनुभव बना देता है।
अगर कोई दर्शक सिर्फ कहानी और बेहतरीन फिल्ममेकिंग की उम्मीद लेकर जाएगा तो उसे कुछ कमियां महसूस हो सकती हैं, लेकिन जो लोग विजय के स्टारडम का जश्न मनाना चाहते हैं उनके लिए यह फिल्म पूरी तरह उसी भावना के साथ बनाई गई है।












