लेजेंडरी प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में निधन, 20 हजार से ज्यादा गानों की अमर आवाज़ हुई खामोश
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| नाम | एस. जानकी (S. Janaki) |
| पूरा नाम | शिष्टला श्रीराममूर्ति जानकी |
| उम्र | 88 वर्ष |
| निधन का स्थान | मैसूरु, कर्नाटक |
| जन्म | 23 अप्रैल 1938 |
| जन्म स्थान | वर्तमान आंध्र प्रदेश |
| पहचान | प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर |
| गाए गए गाने | 20,000 से अधिक |
| भाषाएं | तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, हिंदी सहित कई भाषाएं |
| राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार | 4 |
| राज्य फिल्म पुरस्कार | 33 |
| संगीत करियर | छह दशकों से अधिक |
एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में निधन
भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज और देश की सबसे सम्मानित प्लेबैक सिंगरों में शामिल एस. जानकी का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मैसूरु में अंतिम सांस ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। उनके निधन की खबर सामने आते ही संगीत जगत, फिल्म इंडस्ट्री और करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।
एस. जानकी को दक्षिण भारत की “स्वर कोकिला” के रूप में जाना जाता था। उनकी आवाज़ ने कई पीढ़ियों को भावुक किया और उनके गाए गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
पोती ने परिवार की ओर से दी जानकारी
एस. जानकी के निधन की जानकारी उनकी पोती अब्सुर ने परिवार की ओर से साझा की। उन्होंने भावुक बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी प्यारी दादी और महान गायिका अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
परिवार ने अपने बयान में कहा कि एस. जानकी केवल उनके परिवार की सदस्य नहीं थीं, बल्कि पूरे देश की ऐसी महान कलाकार थीं जिन्होंने अपनी आवाज़ से लाखों-करोड़ों लोगों के जीवन को छुआ। उनके जाने से संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
बचपन से ही दिखने लगी थी संगीत की प्रतिभा
एस. जानकी का जन्म 23 अप्रैल 1938 को वर्तमान आंध्र प्रदेश में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत से गहरा लगाव था। बेहद कम उम्र में ही उनकी गायन प्रतिभा लोगों के सामने आने लगी थी।
बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 9 वर्ष की उम्र में पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी थी। इतनी छोटी उम्र में उनकी आवाज़ और आत्मविश्वास ने सभी को प्रभावित कर दिया था। यही वह शुरुआत थी जिसने आगे चलकर उन्हें भारतीय संगीत की सबसे बड़ी हस्तियों में शामिल कर दिया।
बिना शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा के हासिल की बड़ी सफलता
एस. जानकी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत, अभ्यास और अद्भुत प्रतिभा के दम पर संगीत की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है।

उनकी आवाज़ में भावनाओं को व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता थी। चाहे रोमांटिक गीत हों, भक्ति संगीत, लोकगीत या भावुक धुनें, उन्होंने हर शैली में अपनी अलग पहचान बनाई।
छह दशकों से भी ज्यादा लंबा रहा शानदार करियर
एस. जानकी का संगीत सफर छह दशकों से भी अधिक समय तक चला। इस दौरान उन्होंने हजारों फिल्मों के लिए अपनी आवाज़ दी और लगातार नई पीढ़ियों के कलाकारों के साथ काम करती रहीं।
उन्होंने अपने लंबे करियर में 20,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। इतने बड़े स्तर पर विभिन्न भाषाओं में लगातार उत्कृष्ट गायन करना बेहद दुर्लभ माना जाता है।
उनकी आवाज़ समय के साथ कभी पुरानी नहीं लगी और हर दौर में श्रोताओं ने उन्हें भरपूर प्यार दिया।
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कई भारतीय भाषाओं में गाए यादगार गीत
एस. जानकी केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ के अलावा हिंदी सहित कई भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज़ दी।
हर भाषा में उनके उच्चारण, भाव और गायन शैली की खूब सराहना की गई। यही कारण रहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
विभिन्न भाषाओं में समान सफलता हासिल करना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है और एस. जानकी ने इसे अपने पूरे करियर में साबित किया।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मिले कई बड़े सम्मान
अपने शानदार योगदान के लिए एस. जानकी को देश के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
उन्हें चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। इसके अलावा उन्हें रिकॉर्ड 33 राज्य फिल्म पुरस्कार भी मिले।
इन पुरस्कारों ने यह साबित किया कि उनकी प्रतिभा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं थी, बल्कि संगीत विशेषज्ञों और फिल्म जगत ने भी उनके योगदान को सर्वोच्च सम्मान दिया।
भारतीय संगीत में बनाई अलग पहचान
एस. जानकी ने अपने करियर के दौरान कई महान संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं के साथ काम किया। उनकी आवाज़ ने अनगिनत फिल्मों के गीतों को यादगार बना दिया।
उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वह हर गीत की भावना को पूरी ईमानदारी से प्रस्तुत करती थीं। चाहे किसी फिल्म का दुखभरा गीत हो, प्रेम गीत हो या उत्साह से भरपूर संगीत, उनकी आवाज़ हर भाव को जीवंत बना देती थी।
इसी वजह से उन्हें भारतीय फिल्म संगीत की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में गिना जाता है।
करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा रहेंगी जिंदा
एस. जानकी का निधन भले ही संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है, लेकिन उनकी आवाज़ हमेशा अमर रहेगी। उनके गाए हजारों गीत आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
आज भी उनके कई सदाबहार गाने रेडियो, टेलीविजन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संगीत कार्यक्रमों में सुने जाते हैं। नई पीढ़ी के गायक भी उनकी गायकी को सीखने और समझने की कोशिश करते हैं।
उनकी संगीत यात्रा यह साबित करती है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे होती है और कलाकार अपने कार्यों के माध्यम से हमेशा जीवित रहता है।
संगीत जगत में शोक की लहर
एस. जानकी के निधन की खबर सामने आने के बाद संगीत और फिल्म जगत से जुड़े कलाकारों, प्रशंसकों और सांस्कृतिक जगत की कई हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर लोग उनके पसंदीदा गीत साझा करते हुए उन्हें याद कर रहे हैं।
कई लोगों ने उन्हें भारतीय संगीत की सबसे मधुर और प्रभावशाली आवाज़ों में से एक बताया। उनके निधन को भारतीय फिल्म संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है।
एस. जानकी की विरासत हमेशा रहेगी अमर
एस. जानकी ने अपने जीवन में केवल गीत नहीं गाए, बल्कि संगीत के माध्यम से भावनाओं को आवाज़ दी। उनकी गायकी ने लाखों लोगों के जीवन के सुख-दुख के पलों को यादगार बनाया।
आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मधुर आवाज़, उनके अमर गीत और भारतीय संगीत में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी विरासत आने वाले वर्षों में भी संगीत प्रेमियों और कलाकारों को प्रेरित करती रहेगी।











