दिल्ली के हर स्कूल में अब गुड टच और बैड टच की पढ़ाई, सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला

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By: Deep Garg

On: Friday, July 10, 2026 2:26 PM

दिल्ली के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से बताया कि अब राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसके लिए एनिमेटेड फिल्मों और आसान भाषा में तैयार किए गए शिक्षण सामग्री का उपयोग किया जाएगा ताकि छोटे बच्चे भी इस विषय को आसानी से समझ सकें।

सरकार का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करना भी है, ताकि यदि उनके साथ कोई गलत व्यवहार होता है तो वे बिना डर के अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकें।

एनिमेटेड फिल्मों के जरिए आसान तरीके से होगी पढ़ाई

बच्चों को संवेदनशील विषयों की जानकारी देने के लिए सरकार ने पारंपरिक तरीकों के बजाय एनिमेटेड फिल्मों का सहारा लिया है। छोटे बच्चों के लिए कार्टून और एनिमेशन के माध्यम से सीखना अधिक आसान और प्रभावी माना जाता है।

इन फिल्मों में बच्चों को बताया जाएगा कि कौन-सा स्पर्श सुरक्षित होता है और कौन-सा स्पर्श गलत माना जाता है। साथ ही यह भी सिखाया जाएगा कि किसी भी असहज स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए और किससे मदद मांगनी चाहिए।

इस पहल का मकसद बच्चों को डराना नहीं बल्कि उन्हें जागरूक और सतर्क बनाना है।

सरकारी और निजी दोनों स्कूलों पर लागू होंगे निर्देश

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को इन निर्देशों का पालन करना होगा।

इसका मतलब है कि राजधानी में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों तक यह जागरूकता अभियान पहुंचेगा। सरकार चाहती है कि हर बच्चा अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक बने और स्कूल का वातावरण पूरी तरह सुरक्षित महसूस करे।

स्कूलों को जारी की गई विशेष चेकलिस्ट

दिल्ली सरकार ने सभी स्कूलों के लिए एक विस्तृत चेकलिस्ट भी जारी की है। प्रत्येक स्कूल को इन बिंदुओं की जांच करनी होगी और उनकी अनुपालन रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सरकार को भेजनी होगी।

चेकलिस्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं ताकि स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।

जांच का विषयक्या देखना होगा
सीसीटीवी कैमरेसभी कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं
स्कूल परिसरकहीं कोई सार्वजनिक सुरक्षा जोखिम तो नहीं
ट्रांसपोर्ट व्यवस्थास्कूल बस और अन्य परिवहन सुरक्षित हैं या नहीं
स्टाफ व्यवहारकर्मचारियों और बच्चों के बीच पेशेवर संबंध सुनिश्चित करना
सुरक्षा व्यवस्थास्कूल में बच्चों की सुरक्षा के सभी मानकों का पालन

15 दिनों के भीतर देनी होगी कंप्लायंस रिपोर्ट

सरकार ने सभी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जारी की गई चेकलिस्ट के अनुसार निरीक्षण करने के बाद 15 दिनों के भीतर अपनी कंप्लायंस रिपोर्ट जमा करें।

इस रिपोर्ट में यह जानकारी देनी होगी कि—

  • सभी सीसीटीवी कैमरे सही स्थिति में हैं या नहीं।
  • स्कूल परिसर पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं।
  • बच्चों के लिए परिवहन व्यवस्था सुरक्षित है या नहीं।
  • स्कूल स्टाफ निर्धारित नियमों का पालन कर रहा है या नहीं।
  • सुरक्षा से जुड़े सभी निर्देशों का पालन किया गया है या नहीं।

यदि किसी स्कूल में कमियां पाई जाती हैं तो उन्हें जल्द से जल्द दूर करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

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सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी पर रहेगा जोर

आज के समय में स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, उनका लगातार काम करना भी जरूरी है।

सरकार चाहती है कि हर स्कूल यह सुनिश्चित करे कि सभी कैमरे चालू स्थिति में हों, उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहे और आवश्यकता पड़ने पर फुटेज उपलब्ध कराई जा सके।

इससे किसी भी घटना की जांच में आसानी होगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनेगी।

स्कूल परिसर में सुरक्षा जोखिमों की होगी पहचान

चेकलिस्ट का एक अहम हिस्सा स्कूल परिसर की सुरक्षा जांच भी है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बच्चों के लिए किसी प्रकार का शारीरिक खतरा मौजूद न हो।

स्कूलों को भवन, सीढ़ियां, खेल मैदान, बिजली व्यवस्था, प्रवेश द्वार, शौचालय और अन्य सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण करना होगा ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते दूर किया जा सके।

स्कूल परिवहन की सुरक्षा भी होगी जांच का हिस्सा

हर दिन हजारों बच्चे स्कूल बसों और अन्य वाहनों से स्कूल पहुंचते हैं। इसलिए सरकार ने परिवहन सुरक्षा को भी इस अभियान में शामिल किया है।

स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि—

  • बसों की नियमित जांच हो।
  • चालक और परिचालक का सत्यापन किया गया हो।
  • बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद हों।
  • बच्चों के चढ़ने और उतरने की सुरक्षित व्यवस्था हो।
  • परिवहन से जुड़े सभी नियमों का पालन किया जा रहा हो।

इससे बच्चों की यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

स्टाफ और बच्चों के बीच पेशेवर संबंधों पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में विशेष रूप से कहा कि स्कूल स्टाफ और बच्चों के बीच पेशेवर संबंध बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि कई बार छोटी लापरवाही भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए स्कूल प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी शिक्षक, कर्मचारी और अन्य स्टाफ बच्चों के साथ सम्मानजनक, सुरक्षित और पेशेवर व्यवहार करें।

यह पहल बच्चों के मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा वातावरण को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

दुर्घटना के बाद नहीं, पहले होगी तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर किसी घटना के बाद अफसोस किया जाता है, लेकिन सरकार चाहती है कि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जाए।

बच्चों को जानकारी देना, स्कूलों की जिम्मेदारी तय करना और अभिभावकों को जागरूक बनाना इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं।

एक महीने तक चलेगी जागरूकता ड्राइव

दिल्ली सरकार ने इस अभियान को केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बनाया है। यह पूरे एक महीने तक चलने वाली व्यापक जागरूकता ड्राइव होगी।

इस दौरान विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी दी जाएगी।

स्कूलों में विशेष सत्र आयोजित किए जा सकते हैं, पोस्टर लगाए जा सकते हैं और बच्चों के साथ संवादात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

शिक्षक निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका

इस अभियान में शिक्षकों की जिम्मेदारी सबसे अहम मानी जा रही है। शिक्षक बच्चों के सबसे करीब होते हैं और वे उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों को जल्दी पहचान सकते हैं।

इसलिए शिक्षकों को भी संवेदनशील विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे बच्चों से सही तरीके से संवाद कर सकें और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता उपलब्ध करा सकें।

अभिभावकों की भागीदारी भी होगी जरूरी

सरकार का मानना है कि केवल स्कूलों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। बच्चों की सुरक्षा में माता-पिता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

अभिभावकों को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करने, उनकी समस्याओं को सुनने और किसी भी असामान्य व्यवहार पर तुरंत ध्यान देने की सलाह दी जाएगी।

घर और स्कूल दोनों का सहयोग बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।

जिला प्रशासन, पुलिस और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जाएगा

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस जागरूकता अभियान में केवल स्कूल ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी शामिल किया जाएगा।

इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। पुलिस जागरूकता कार्यक्रमों में भाग ले सकती है, जिला प्रशासन निगरानी करेगा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता छोटे बच्चों और उनके परिवारों तक सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाने में सहयोग करेंगे।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

गुड टच और बैड टच जैसी जानकारी बच्चों को आत्मरक्षा की पहली सीख देती है। जब बच्चे सही और गलत स्पर्श का अंतर समझते हैं तो वे किसी भी संदिग्ध स्थिति को पहचानने में अधिक सक्षम हो जाते हैं।

सरकार की यह पहल बच्चों में जागरूकता, आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी और सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी से राजधानी के स्कूलों में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।

Deep Garg

Deepak Garg is the founder and editor of TajaTimes.com. He covers technology, business, entertainment, lifestyle, and trending news with a focus on accurate and timely reporting.

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