पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पनबस (PUNBUS) के हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर दो विभागों के कर्मचारी समान काम कर रहे हैं, तो उन्हें समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। यह फैसला पनबस कर्मचारियों के लिए लंबे समय से चल रही लड़ाई में एक महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है। इसके साथ ही कर्मचारियों के नियमितीकरण (रेगुलर करने) की उम्मीदें भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई हैं।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखा सिंगल बेंच का फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पहले दिए गए फैसले को पूरी तरह सही माना है। पंजाब सरकार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद अब सिंगल बेंच के आदेश प्रभावी रहेंगे। यानी पनबस कर्मचारियों को पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों के बराबर वेतन और अन्य भत्ते देने की दिशा में सरकार को कदम उठाने होंगे।
क्या था पूरा मामला?
काफी समय से पनबस के कर्मचारी यह मांग कर रहे थे कि वे और पंजाब रोडवेज के कर्मचारी लगभग एक जैसा काम करते हैं। दोनों ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में बस संचालन, यात्रियों की सेवा और अन्य जिम्मेदारियां निभाते हैं।

इसके बावजूद दोनों विभागों के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं में बड़ा अंतर था। इसी असमानता को लेकर कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सिंगल बेंच ने कर्मचारियों की दलीलों को सही मानते हुए उनके पक्ष में फैसला दिया था। अब डिवीजन बेंच ने भी उसी फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
बराबर काम तो बराबर वेतन
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यदि दो विभागों के कर्मचारी समान प्रकृति का काम कर रहे हैं, उनकी जिम्मेदारियां एक जैसी हैं और कार्य का स्तर भी समान है, तो उन्हें “बराबर काम के लिए बराबर वेतन” के सिद्धांत के अनुसार समान वेतन और सुविधाएं मिलनी चाहिए।
अदालत का मानना है कि केवल विभाग का नाम अलग होने के आधार पर कर्मचारियों के साथ वेतन और सुविधाओं में भेदभाव नहीं किया जा सकता।
यह फैसला भविष्य में ऐसे अन्य मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा सकता है।
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पंजाब सरकार को लगा बड़ा झटका
पंजाब सरकार ने मार्च महीने में सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी। सरकार का प्रयास था कि पहले दिए गए आदेश को रद्द कराया जाए।
लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और अपील को खारिज कर दिया। इसके साथ ही पहले दिए गए आदेश को सही ठहराया गया।
इस फैसले के बाद अब सरकार पर अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।
कर्मचारियों के लिए क्या होंगे फायदे?
अगर अदालत के आदेश के अनुसार सरकार आवश्यक कदम उठाती है, तो पनबस कर्मचारियों को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं।
सबसे पहला फायदा वेतन में बढ़ोतरी का हो सकता है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के भत्ते और सेवा संबंधी अन्य सुविधाएं भी पंजाब रोडवेज कर्मचारियों के बराबर मिलने की संभावना है।
इस फैसले से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।
रेगुलर करने पर भी कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने केवल वेतन का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले पर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
अदालत ने पंजाब सरकार से कहा है कि पनबस कर्मचारियों को नियमित करने के मामले पर कानून के अनुसार विचार किया जाए।
हालांकि कोर्ट ने सीधे सभी कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन सरकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत इस विषय पर निर्णय लेने के लिए कहा गया है।
इस निर्देश के बाद कर्मचारियों की स्थायी नौकरी की उम्मीदें भी मजबूत हुई हैं।
हजारों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत
पनबस में बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं। इनमें ड्राइवर, कंडक्टर, तकनीकी कर्मचारी और अन्य स्टाफ शामिल हैं।
अगर अदालत के फैसले को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो हजारों कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
कर्मचारियों को न केवल वेतन संबंधी राहत मिलेगी बल्कि सेवा शर्तों में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
कर्मचारियों की लंबे समय से थी मांग
पनबस कर्मचारियों का कहना था कि वे वर्षों से पंजाब रोडवेज कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही थीं।
उनका तर्क था कि समान जिम्मेदारी निभाने के बावजूद अलग वेतनमान देना संविधान में समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
इसी आधार पर उन्होंने अदालत में न्याय की मांग की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने स्वीकार किया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पंजाब सरकार को अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेने होंगे।
सरकार को यह भी तय करना होगा कि कर्मचारियों को समान वेतन और भत्ते किस प्रक्रिया के तहत दिए जाएंगे। साथ ही नियमितीकरण के मुद्दे पर भी कानून के अनुरूप विचार करना होगा।
यह फैसला सरकार के वित्तीय बोझ को बढ़ा सकता है, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
आगे कर्मचारियों की क्या उम्मीदें हैं?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पनबस कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है। उन्हें विश्वास है कि अब उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होगी।
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यदि अदालत के आदेशों को पूरी तरह लागू किया गया, तो हजारों परिवारों को आर्थिक और सेवा संबंधी बड़ी राहत मिलेगी।
अब सभी की नजर पंजाब सरकार के अगले कदम पर रहेगी कि वह हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार कब और किस तरह फैसले को लागू करती है।






