भारत के पूर्व कप्तान और महान विकेटकीपर-बल्लेबाज एमएस धोनी का नाम क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में लिया जाता है। 7 जुलाई को धोनी अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। यह दिन उनके करोड़ों प्रशंसकों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। अपने पूरे करियर में धोनी ने न सिर्फ टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि कई ऐसे रिकॉर्ड भी बनाए जो आज तक कायम हैं।
धोनी हमेशा अपने शांत स्वभाव, बेहतरीन रणनीति और मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसला लेने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। मैदान पर उनका अंदाज जितना आक्रामक था, मैदान के बाहर वह उतने ही सरल और लाइमलाइट से दूर रहने वाले व्यक्ति रहे। यही वजह है कि अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का उनका फैसला भी पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाला था।
हालांकि उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके बनाए रिकॉर्ड आज भी दुनिया भर के खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। आइए जानते हैं एमएस धोनी के पांच ऐसे ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जिन्हें तोड़ना बेहद कठिन माना जाता है।
दुनिया में सबसे ज्यादा इंटरनेशनल मैचों में कप्तानी करने का रिकॉर्ड
एमएस धोनी दुनिया के सबसे सफल और सबसे अनुभवी कप्तानों में शामिल हैं। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैचों में कप्तानी करने का रिकॉर्ड दर्ज है।
धोनी ने भारत की कप्तानी करते हुए कुल 332 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में टीम का नेतृत्व किया। इनमें टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों प्रारूप शामिल हैं।
इन मुकाबलों में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 178 मैचों में जीत हासिल की। वहीं 120 मैचों में हार मिली। इसके अलावा 6 मुकाबले टाई रहे और 15 टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुए।
अगर तीनों प्रारूपों की बात करें तो धोनी ने भारत के लिए 60 टेस्ट, 200 वनडे और 72 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी की। इतने लंबे समय तक लगातार कप्तानी करना और टीम को सफलता दिलाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता।
आज भी दुनिया का कोई कप्तान इस रिकॉर्ड के करीब नहीं पहुंच पाया है।
विकेट के पीछे सबसे ज्यादा स्टंपिंग करने वाले विकेटकीपर
धोनी की बिजली जैसी तेज स्टंपिंग ने कई बड़े बल्लेबाजों को चौंका दिया। विकेट के पीछे उनकी फुर्ती और गेंद को पकड़ने की गति उन्हें बाकी विकेटकीपरों से अलग बनाती थी।

अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के 538 मैचों में धोनी ने 195 बल्लेबाजों को स्टंप आउट किया। यह आंकड़ा आज भी विश्व रिकॉर्ड है।
प्रारूप के अनुसार देखें तो उन्होंने—
- टेस्ट क्रिकेट में 38 स्टंपिंग
- वनडे क्रिकेट में 120 स्टंपिंग
- टी20 अंतरराष्ट्रीय में 34 स्टंपिंग
की हैं।
धोनी का यह रिकॉर्ड बताता है कि विकेटकीपिंग में उनकी पकड़ कितनी मजबूत थी। आधुनिक क्रिकेट में भी किसी विकेटकीपर के लिए इस आंकड़े तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है।
सबसे तेज स्टंपिंग का विश्व रिकॉर्ड
एमएस धोनी के नाम सिर्फ सबसे ज्यादा स्टंपिंग करने का रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि सबसे तेज स्टंपिंग करने का भी रिकॉर्ड दर्ज है।
धोनी ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज कीमो पॉल को मात्र 0.08 सेकंड में स्टंप कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था।
यह स्टंपिंग इतनी तेज थी कि रिप्ले देखने के बाद भी कई लोगों को यकीन नहीं हुआ कि बल्लेबाज इतनी जल्दी आउट हो गया।
धोनी की यही खासियत उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक विकेटकीपरों में शामिल करती है। बल्लेबाज अक्सर क्रीज से बाहर निकलने से पहले कई बार सोचते थे क्योंकि उन्हें पता था कि पीछे एमएस धोनी खड़े हैं।
आज भी यह रिकॉर्ड क्रिकेट इतिहास के सबसे अविश्वसनीय रिकॉर्डों में गिना जाता है।
तीन अलग-अलग आईसीसी ट्रॉफी जीतने वाले दुनिया के इकलौते कप्तान
एमएस धोनी की कप्तानी का सबसे बड़ा परिचय उनकी आईसीसी टूर्नामेंट में मिली सफलता है।
दुनिया के क्रिकेट इतिहास में वह आज भी एकमात्र ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने तीन अलग-अलग आईसीसी ट्रॉफियां अपने नाम की हैं।
उनकी कप्तानी में भारत ने—
- 2007 टी20 विश्व कप
- 2011 वनडे विश्व कप
- 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी
का खिताब जीता।
2007 का टी20 विश्व कप भारत की युवा टीम के लिए एक नई शुरुआत साबित हुआ। इसके बाद 2011 में धोनी ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में छक्का लगाकर भारत को 28 साल बाद विश्व कप दिलाया। वहीं 2013 में इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर उन्होंने अपनी कप्तानी का एक और शानदार अध्याय लिखा।
अब तक दुनिया का कोई भी दूसरा कप्तान यह उपलब्धि हासिल नहीं कर सका है। यही कारण है कि धोनी को क्रिकेट इतिहास का सबसे सफल आईसीसी कप्तान माना जाता है।
विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में वनडे में सबसे बड़ी पारी
एमएस धोनी सिर्फ शानदार कप्तान और विकेटकीपर ही नहीं थे, बल्कि जरूरत पड़ने पर मैच जिताने वाले बल्लेबाज भी थे।
31 अक्टूबर 2005 को जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ खेली गई उनकी ऐतिहासिक पारी आज भी क्रिकेट प्रेमियों को याद है।
उस मुकाबले में धोनी ने नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 183 रन बनाए थे। यह किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज द्वारा वनडे क्रिकेट में बनाया गया सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था।
अपनी इस विस्फोटक पारी में उन्होंने—
- 15 चौके
- 10 शानदार छक्के
लगाए थे।
धोनी की इस पारी ने भारत को शानदार जीत दिलाई और पूरी दुनिया को बता दिया कि वह सिर्फ विकेटकीपर नहीं, बल्कि बड़े मैचों के बड़े खिलाड़ी हैं।
इस रिकॉर्ड से पहले वनडे क्रिकेट में विकेटकीपर बल्लेबाज के सबसे बड़े स्कोर का रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के महान खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट के नाम था। लेकिन धोनी ने अपनी ऐतिहासिक पारी से उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया और नया इतिहास रच दिया।
शांत स्वभाव लेकिन रिकॉर्ड बनाने में सबसे आगे
एमएस धोनी का व्यक्तित्व हमेशा बाकी खिलाड़ियों से अलग रहा। उन्होंने कभी अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं किया और हमेशा टीम को व्यक्तिगत रिकॉर्ड से ऊपर रखा।
चाहे कप्तानी की बात हो, विकेटकीपिंग की या फिर बल्लेबाजी की, हर क्षेत्र में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया जिसे क्रिकेट इतिहास हमेशा याद रखेगा।
धोनी की सबसे बड़ी ताकत उनका धैर्य, शांत दिमाग और मैच को आखिरी ओवर तक ले जाकर जीतने की क्षमता थी। इसी वजह से उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशरों में भी गिना जाता है।
आज भी नए खिलाड़ी धोनी की कप्तानी, उनकी विकेटकीपिंग तकनीक और दबाव में फैसले लेने की कला से प्रेरणा लेते हैं। उनके जन्मदिन पर उनके ये पांच रिकॉर्ड एक बार फिर याद दिलाते हैं कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कितनी ऊंचाइयों तक पहुंचाया और क्यों उनका नाम हमेशा क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में लिया जाएगा।








