NITI Aayog Meeting 2026: CM विजय ने NEET का किया विरोध, MBBS-BDS प्रवेश के लिए रखी बड़ी मांग

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By: Deep Garg

On: Friday, June 12, 2026 7:01 PM

नीति आयोग की बैठक में NEET के खिलाफ तमिलनाडु का मजबूत पक्ष

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने एक बार फिर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी NEET को लेकर राज्य का विरोध दोहराया है। नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के सामने तमिलनाडु की लंबे समय से चली आ रही मांग को प्रमुखता से रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि मेडिकल और डेंटल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET परीक्षा छात्रों के साथ समान अवसर का व्यवहार नहीं करती है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को इस परीक्षा के कारण कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तमिलनाडु को राज्य कोटे के तहत आने वाली MBBS, BDS और AYUSH सीटों में प्रवेश केवल 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर देने की अनुमति प्रदान की जाए।

नीति आयोग की बैठक में उठाया गया अहम मुद्दा

नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। इस महत्वपूर्ण मंच पर मुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों को सामने रखा।

बैठक में विकास, आर्थिक प्रगति, केंद्र-राज्य सहयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इसी दौरान मुख्यमंत्री विजय ने NEET परीक्षा के प्रभाव को लेकर अपनी बात रखी और कहा कि यह परीक्षा कई प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बाधा बन रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर उच्च शिक्षा में प्रवेश की परंपरा का पालन करती रही है और इससे छात्रों को उचित अवसर भी मिलते रहे हैं।

मुख्यमंत्री विजय ने क्यों जताया NEET पर विरोध

मुख्यमंत्री विजय का कहना है कि NEET लागू होने के बाद ग्रामीण और गरीब परिवारों के छात्रों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। उनके अनुसार इस परीक्षा की तैयारी के लिए महंगे कोचिंग संस्थानों की आवश्यकता पड़ती है, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि शहरों के अपेक्षाकृत संपन्न परिवारों के छात्रों को कोचिंग, अध्ययन सामग्री और अन्य संसाधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र इन सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

ऐसे में प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करना उनके लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री का मानना है कि इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता बढ़ती है।

ग्रामीण छात्रों की शिक्षा पर पड़ रहा प्रभाव

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से यह दावा करती रही है कि NEET के कारण ग्रामीण छात्रों की मेडिकल शिक्षा में भागीदारी कम हुई है।

राज्य सरकार का तर्क है कि पहले सरकारी स्कूलों और गांवों के कई छात्र केवल अपने शैक्षणिक प्रदर्शन के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्राप्त कर लेते थे। लेकिन अब उन्हें एक अलग राष्ट्रीय परीक्षा पास करनी पड़ती है, जिसके लिए अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता होती है।

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि कई प्रतिभाशाली छात्र केवल इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उन्हें उचित कोचिंग और मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की चिंता

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लाखों परिवार ऐसे हैं जो अपने बच्चों को महंगी कोचिंग नहीं दिला सकते।

NEET परीक्षा के लिए देशभर में कोचिंग उद्योग काफी बड़ा हो चुका है। कई छात्र परीक्षा की तैयारी के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं। ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

मुख्यमंत्री का मानना है कि मेडिकल शिक्षा का अवसर केवल उन छात्रों तक सीमित नहीं होना चाहिए जो महंगी तैयारी कर सकें। बल्कि यह अवसर हर प्रतिभाशाली छात्र को मिलना चाहिए।

12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश की मांग

नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने स्पष्ट रूप से कहा कि तमिलनाडु को राज्य कोटे के अंतर्गत आने वाली MBBS, BDS और AYUSH सीटों में प्रवेश केवल 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर देने की अनुमति दी जानी चाहिए।

उनका कहना है कि स्कूल स्तर पर छात्रों द्वारा कई वर्षों की मेहनत और शैक्षणिक प्रदर्शन को अधिक महत्व मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री का तर्क है कि एक दिन की परीक्षा किसी छात्र की पूरी क्षमता का सही मूल्यांकन नहीं कर सकती। वहीं 12वीं कक्षा के परिणाम छात्र की निरंतर मेहनत और शैक्षणिक योग्यता को दर्शाते हैं।

MBBS, BDS और AYUSH सीटों को लेकर क्या है मांग

तमिलनाडु सरकार की मांग केवल मेडिकल कॉलेजों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री विजय ने MBBS और BDS के साथ-साथ AYUSH पाठ्यक्रमों में भी राज्य को अपने तरीके से प्रवेश प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।

AYUSH के अंतर्गत आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसे चिकित्सा पाठ्यक्रम शामिल हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि इन सभी पाठ्यक्रमों में राज्य कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने और 12वीं के अंकों के आधार पर चयन करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

तमिलनाडु और NEET विवाद का लंबा इतिहास

NEET को लेकर तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। जब से देशभर में मेडिकल प्रवेश के लिए NEET को अनिवार्य किया गया है, तब से तमिलनाडु लगातार इसका विरोध करता रहा है।

राज्य सरकारों ने कई बार केंद्र से छूट की मांग की। विधानसभा में भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए। हालांकि अभी तक NEET देशभर में मेडिकल प्रवेश के लिए अनिवार्य बना हुआ है।

मुख्यमंत्री विजय ने भी उसी पुराने रुख को आगे बढ़ाते हुए राज्य की मांग को दोबारा राष्ट्रीय मंच पर उठाया है।

छात्रों और अभिभावकों के बीच लगातार बहस

NEET को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस होती रही है। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय स्तर पर समान अवसर प्रदान करने वाली परीक्षा मानते हैं, जबकि कुछ इसके विरोध में तर्क देते हैं।

तमिलनाडु सरकार का मानना है कि राज्य बोर्ड के छात्रों को इस परीक्षा में अपेक्षाकृत अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

वहीं कई विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर एक समान परीक्षा होने से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आती है। इसी वजह से यह विषय लंबे समय से चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

नीति आयोग के मंच से संदेश देने की कोशिश

मुख्यमंत्री विजय द्वारा नीति आयोग जैसे महत्वपूर्ण मंच पर NEET का मुद्दा उठाना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह मंच केंद्र और राज्यों के बीच संवाद का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में तमिलनाडु सरकार ने अपनी चिंताओं और मांगों को सीधे प्रधानमंत्री और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने रखा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे राज्य सरकार अपनी स्थिति को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक मजबूती से प्रस्तुत करना चाहती है।

शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय बहस को मिल सकती है नई दिशा

मुख्यमंत्री विजय के बयान के बाद एक बार फिर देश में मेडिकल शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश प्रणाली को लेकर विभिन्न राज्यों की अलग-अलग परिस्थितियां हैं। ऐसे में राज्यों की मांगों और राष्ट्रीय मानकों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।

तमिलनाडु का पक्ष यह है कि स्थानीय परिस्थितियों और सामाजिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रवेश प्रक्रिया में कुछ लचीलापन दिया जाना चाहिए।

सामाजिक न्याय का मुद्दा भी उठा रहे हैं मुख्यमंत्री

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से सामाजिक न्याय को अपनी नीतियों का महत्वपूर्ण आधार बताती रही है। मुख्यमंत्री विजय ने भी अपने संबोधन में अप्रत्यक्ष रूप से इसी मुद्दे पर जोर दिया।

उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में अवसरों की समानता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि किसी परीक्षा के कारण ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्र पीछे रह जाते हैं, तो उस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार का मानना है कि मेडिकल शिक्षा तक पहुंच सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री विजय द्वारा नीति आयोग की बैठक में NEET के खिलाफ तमिलनाडु का पक्ष मजबूती से रखने के बाद इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज होने की संभावना है। राज्य सरकार का कहना है कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जो सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान करे। फिलहाल तमिलनाडु सरकार अपनी मांग पर कायम है और राज्य के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से लगातार संवाद कर रही है।

Deep Garg

Deepak Garg is the founder and editor of TajaTimes.com. He covers technology, business, entertainment, lifestyle, and trending news with a focus on accurate and timely reporting.

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