Uttarda Da Puttar Review: 1 घंटा 40 मिनट की शानदार फैमिली एंटरटेनर, अनू कपूर ने जीत लिया दिल

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By: Ramesh Aggarwal

On: Saturday, July 25, 2026 1:27 PM

अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जिनमें हल्की-फुल्की कॉमेडी हो, दमदार किरदार हों और पूरी फिल्म बिना बोर किए आपको बांधे रखे, तो “उत्तरदा दा पुत्तर” आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह फिल्म पुराने दौर की उन शानदार कॉमेडी फिल्मों की याद दिलाती है, जिनमें कहानी, अभिनय और हास्य का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता था।

करीब 1 घंटा 40 मिनट लंबी यह फिल्म शुरुआत से आखिर तक मनोरंजन करती है। खास बात यह है कि फिल्म किसी तरह का अंधविश्वास नहीं फैलाती, बल्कि मजेदार अंदाज में कई सामाजिक पहलुओं को भी दिखाती है।

फिल्म की कहानी क्या है?

फिल्म की कहानी एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो विज्ञान का शिक्षक होने के बावजूद ज्योतिष और वास्तु पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करता है।

उसकी आदतें इतनी अनोखी हैं कि वह हर छोटे-बड़े काम में दिशा और शुभ-अशुभ का ध्यान रखता है। यहां तक कि वह टॉयलेट सीट पर भी उत्तर दिशा की ओर बैठने की कोशिश करता है। अगर कोई उसे काले कपड़े पहनने की सलाह देता है तो वह मजाकिया अंदाज में बुर्का पहनकर भी पहुंच जाता है।

इसी सोच के साथ वह अपने सपनों का घर बनाना चाहता है। लेकिन घर बनाने की इस पूरी प्रक्रिया में ऐसी-ऐसी घटनाएं होती हैं कि हर कुछ मिनट में नया हास्य पैदा हो जाता है।

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि कॉमेडी जबरदस्ती नहीं डाली गई, बल्कि हर स्थिति से स्वाभाविक रूप से निकलकर आती है।

विज्ञान और ज्योतिष के बीच दिलचस्प टकराव

आमतौर पर फिल्मों में विज्ञान और ज्योतिष को एक-दूसरे के विरोधी रूप में दिखाया जाता है। लेकिन यहां मजेदार बात यह है कि मुख्य किरदार खुद फिजिक्स का प्रोफेसर है और फिर भी वह ज्योतिष पर आंख बंद करके भरोसा करता है।

यही विरोधाभास पूरी कहानी को अलग बनाता है।

कई जगह दर्शकों को हंसी इसलिए आती है क्योंकि एक वैज्ञानिक सोच रखने वाला व्यक्ति भी ऐसी-ऐसी मान्यताओं में उलझा हुआ दिखाई देता है कि हालात पूरी तरह कॉमिक बन जाते हैं।

पुरानी क्लासिक कॉमेडी फिल्मों की याद दिलाती है

फिल्म देखते समय कई बार ऐसा महसूस होता है कि यह उन फिल्मों की परंपरा को आगे बढ़ा रही है जिन्हें दर्शकों ने हमेशा पसंद किया।

“खोसला का घोंसला”“विक्की डोनर” और इसी तरह की हल्की-फुल्की लेकिन मजबूत कहानी वाली फिल्मों की याद इस फिल्म को देखते हुए बार-बार आती है।

आज के समय में इस तरह की साफ-सुथरी और परिवार के साथ बैठकर देखने वाली कॉमेडी फिल्में बहुत कम बनती हैं। ऐसे में “उत्तरदा दा पुत्तर” अलग पहचान बनाने में सफल नजर आती है।

अनू कपूर ने अपने अभिनय से लूटी महफिल

अगर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत की बात की जाए तो वह हैं अनू कपूर

उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, डायलॉग डिलीवरी और कॉमिक टाइमिंग हर सीन में जान डाल देती है।

उन्होंने अपने किरदार को इतना स्वाभाविक बनाया है कि कई जगह केवल उनके एक्सप्रेशन ही दर्शकों को हंसाने के लिए काफी हैं।

अनू कपूर का अनुभव इस फिल्म में साफ दिखाई देता है।

विजेंद्र काला ने फिर साबित किया अपना हुनर

विजेंद्र काला एक ऐसे कलाकार हैं जो छोटे से किरदार में भी बड़ी छाप छोड़ देते हैं।

इस फिल्म में भी उनका अभिनय शानदार है।

उनकी कॉमिक टाइमिंग बिल्कुल नेचुरल लगती है और कहीं भी ओवर एक्टिंग महसूस नहीं होती।

रुसार रहमान ने निभाया दमदार किरदार

फिल्म में रुसार रहमान का काम भी काफी प्रभावशाली है।

उन्होंने अपने किरदार को सादगी के साथ निभाया है और कहानी के भावनात्मक हिस्सों में भी अच्छा संतुलन बनाया है।

उनकी मौजूदगी फिल्म को मजबूती देती है।

पवन मल्होत्रा का शानदार प्रदर्शन

पवन मल्होत्रा हमेशा अपने अभिनय से प्रभावित करते हैं।

इस फिल्म में भी उन्होंने अपने अनुभव का पूरा फायदा उठाया है।

उनका हर सीन कहानी को आगे बढ़ाता है और उनका अभिनय बिल्कुल वास्तविक लगता है।

जिवेशु अहलूवालिया ने किया प्रभावित

जिवेशु अहलूवालिया ने भी बेहतरीन काम किया है।

उनका अभिनय कहीं भी कमजोर नहीं पड़ता और वह बाकी कलाकारों के साथ शानदार तालमेल बनाते हैं।

इश्तियाक खान का किरदार सबसे अलग

फिल्म का सबसे अलग और यादगार किरदार इश्तियाक खान का कहा जा सकता है।

उनके साथ एक ऐसा व्यक्ति हमेशा रहता है जिसका काम केवल लोगों से हाथ मिलाना और नमस्ते करना होता है।

पहली नजर में यह बात अजीब लगती है लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसके पीछे की वजह सामने आती है और वहीं से दर्शकों को जबरदस्त हंसी आती है।

कॉमेडी पूरी तरह सिचुएशन से निकलती है

आजकल कई फिल्मों में कॉमेडी केवल डायलॉग या डबल मीनिंग बातों के जरिए दिखाई जाती है।

लेकिन “उत्तरदा दा पुत्तर” में ऐसा बिल्कुल नहीं है।

यहां हास्य पूरी तरह परिस्थितियों से पैदा होता है।

किरदार जैसे-जैसे अलग-अलग हालात में फंसते हैं, वैसे-वैसे कॉमेडी अपने आप सामने आती है।

यही वजह है कि फिल्म कहीं भी बनावटी नहीं लगती।

परिवार के साथ आराम से देखी जा सकती है

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे पूरा परिवार एक साथ बैठकर देख सकता है।

किसी भी सीन में ऐसी असहज स्थिति नहीं आती जहां दर्शकों को नजरें झुकानी पड़ें।

आज के दौर में जब कई फिल्मों में जरूरत से ज्यादा बोल्ड कंटेंट देखने को मिलता है, वहां यह फिल्म साफ-सुथरा मनोरंजन देती है।

फिल्म का गाना भी छोड़ता है असर

फिल्म के बीच में आने वाला एक गाना काफी मजेदार है।

इसका अंदाज पुराने लोकप्रिय गीत “ओए लकी लकी ओए” जैसी ऊर्जा का एहसास कराता है।

गाने की धुन और प्रस्तुति फिल्म के माहौल को और मनोरंजक बना देती है।

संभावना है कि यह गाना दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हो सकता है।

निर्देशन में रविंद्र श्रीवास्तव का शानदार डेब्यू

इस फिल्म का निर्देशन रविंद्र श्रीवास्तव ने किया है।

यह उनकी पहली निर्देशित फिल्म है और पहली ही कोशिश में उन्होंने प्रभावित किया है।

उन्होंने कहानी को जरूरत से ज्यादा लंबा नहीं खींचा और हर किरदार को पर्याप्त जगह दी है।

फिल्म की गति लगातार बनी रहती है, जिससे दर्शक अंत तक जुड़े रहते हैं।

पहली फिल्म होने के बावजूद निर्देशन में आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है।

फिल्म की अवधि भी है बड़ा प्लस पॉइंट

आजकल कई फिल्में ढाई से तीन घंटे तक लंबी होती हैं।

लेकिन “उत्तरदा दा पुत्तर” केवल करीब 1 घंटा 40 मिनट की फिल्म है।

यही वजह है कि कहानी कहीं भी खिंची हुई महसूस नहीं होती।

हर सीन का अपना उद्देश्य है और फिल्म तेजी से आगे बढ़ती है।

किन दर्शकों को जरूर देखनी चाहिए यह फिल्म?

अगर आपको साफ-सुथरी कॉमेडी पसंद है, परिवार के साथ फिल्में देखना पसंद है और अभिनय प्रधान सिनेमा अच्छा लगता है, तो यह फिल्म आपके लिए है।

जिन लोगों को “खोसला का घोंसला”, “विक्की डोनर” जैसी हल्की-फुल्की लेकिन मजबूत कहानी वाली फिल्में पसंद आई थीं, उन्हें भी यह फिल्म काफी पसंद आ सकती है।

फिल्म की प्रमुख जानकारी

जानकारीविवरण
फिल्म का नामउत्तरदा दा पुत्तर
जॉनरकॉमेडी, फैमिली ड्रामा
अवधिलगभग 1 घंटा 40 मिनट
निर्देशकरविंद्र श्रीवास्तव
मुख्य कलाकारअनू कपूर, विजेंद्र काला, रुसार रहमान, पवन मल्होत्रा, जिवेशु अहलूवालिया, इश्तियाक खान
खासियतनेचुरल कॉमेडी, फैमिली एंटरटेनमेंट
क्या अंधविश्वास को बढ़ावा देती है?नहीं
परिवार के साथ देखने योग्यहां
रेटिंग5 में से 3 स्टार
देखने की सलाहफैमिली कॉमेडी पसंद करने वालों के लिए अच्छी फिल्म

Ramesh Aggarwal

Ramesh Aggarwal TajaTimes.com के पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। वे टेक्नोलॉजी, लाइफस्टाइल, मनोरंजन और ट्रेंडिंग खबरों पर सरल, सटीक और विश्वसनीय लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक उपयोगी और ताज़ा जानकारी पहुंचाना है।

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