महाराष्ट्र में UCC की बड़ी पहल: फडणवीस सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी, जानिए क्या होगा इसका असर

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By: Deep Garg

On: Thursday, July 9, 2026 3:02 PM

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला

महाराष्ट्र की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सात सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी के गठन की घोषणा की है। इस कमेटी का उद्देश्य राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए आवश्यक नियमों और कानूनी ढांचे का अध्ययन करना तथा सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपना होगा।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा में की। सरकार का कहना है कि कमेटी सभी कानूनी, सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं का गहन अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें देगी, जिसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जिसके तहत सभी नागरिकों पर धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू होने के बजाय एक समान नागरिक कानून लागू किया जाता है।

यह कानून मुख्य रूप से विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार, संपत्ति का बंटवारा और पारिवारिक मामलों जैसे विषयों से जुड़ा होता है। वर्तमान में भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन सभी को एक समान कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत लाना है।

विधानसभा में मुख्यमंत्री फडणवीस का ऐलान

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में कहा कि महाराष्ट्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में यूसीसी के नियमों का प्रारूप तैयार करने और सभी पक्षों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जा रही है।

सरकार का मानना है कि किसी भी बड़े कानूनी बदलाव से पहले विशेषज्ञों की राय लेना आवश्यक है ताकि कानून पूरी तरह संवैधानिक और व्यावहारिक हो।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई करेंगी कमेटी की अध्यक्षता

इस सात सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई करेंगी। न्यायपालिका में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना है।

जस्टिस रंजना देसाई विभिन्न संवैधानिक और कानूनी मामलों में अपने अनुभव के लिए जानी जाती हैं। उनके नेतृत्व में समिति विभिन्न राज्यों के अनुभव, मौजूदा कानूनों और संविधान के प्रावधानों का अध्ययन करेगी।

कमेटी में कौन-कौन होंगे शामिल?

सरकार द्वारा गठित इस एक्सपर्ट कमेटी में कुल सात सदस्य होंगे। इनमें विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी लोगों को शामिल किया गया है ताकि सभी पहलुओं पर संतुलित विचार किया जा सके।

सदस्य श्रेणीसंख्याभूमिका
अध्यक्ष (पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज)1समिति का नेतृत्व और अंतिम रिपोर्ट तैयार करना
पूर्व सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश3कानूनी और न्यायिक सुझाव देना
संवैधानिक विशेषज्ञ1संविधान से जुड़े पहलुओं का अध्ययन
पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह1प्रशासनिक व्यवस्था और लागू करने की प्रक्रिया पर सुझाव
सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ2सामाजिक प्रभाव और जनहित के मुद्दों पर राय देना

कमेटी का मुख्य उद्देश्य क्या होगा?

इस समिति का प्रमुख कार्य राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करना होगा।

कमेटी निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दे सकती है—

  • वर्तमान व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन।
  • संविधान के प्रावधानों का विश्लेषण।
  • विभिन्न समुदायों की राय और सुझाव।
  • अन्य राज्यों के अनुभवों का मूल्यांकन।
  • यूसीसी लागू करने की व्यावहारिक चुनौतियां।
  • आवश्यक कानूनी संशोधनों की सिफारिश।
  • नियमों का प्रारूप तैयार करना।

सरकार क्यों बना रही है एक्सपर्ट कमेटी?

यूनिफॉर्म सिविल कोड एक संवेदनशील और व्यापक विषय माना जाता है। इसका संबंध सीधे नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों और पारिवारिक कानूनों से जुड़ा होता है।

ऐसे में सरकार किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है। कमेटी का गठन इसी उद्देश्य से किया गया है ताकि सभी कानूनी और सामाजिक पहलुओं का संतुलित अध्ययन हो सके।

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यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया कैसी होगी?

किसी भी राज्य में यूसीसी लागू करने से पहले कई स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

सबसे पहले एक्सपर्ट कमेटी अपना अध्ययन करेगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। यदि सरकार रिपोर्ट से सहमत होती है तो आवश्यक नियम और विधेयक तैयार किए जा सकते हैं। इसके बाद विधानसभा में चर्चा और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया में पर्याप्त समय लग सकता है क्योंकि इसमें कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक सभी पहलुओं पर विचार करना आवश्यक होता है।

किन विषयों पर पड़ सकता है असर?

यदि भविष्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होता है तो इसका प्रभाव कई नागरिक मामलों पर पड़ सकता है।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • विवाह का पंजीकरण
  • तलाक की प्रक्रिया
  • गोद लेने के नियम
  • उत्तराधिकार और संपत्ति का बंटवारा
  • पारिवारिक अधिकार
  • महिलाओं और बच्चों से जुड़े अधिकार
  • पारिवारिक विवादों का निपटारा

हालांकि फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने केवल विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की है। किसी नए कानून को लागू करने का अंतिम निर्णय समिति की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा।

महाराष्ट्र में आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर इस सात सदस्यीय समिति के कामकाज पर रहेगी। समिति विभिन्न पक्षों से सुझाव लेने, कानूनी अध्ययन करने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य करेगी।

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ तो मसौदा कानून तैयार कर विधानसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने यूसीसी की दिशा में पहला औपचारिक कदम उठाते हुए विशेषज्ञ समिति का गठन कर दिया है। आने वाले समय में समिति की सिफारिशें राज्य की कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

Deep Garg

Deepak Garg is the founder and editor of TajaTimes.com. He covers technology, business, entertainment, lifestyle, and trending news with a focus on accurate and timely reporting.

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