दो महीने की शांति के बाद फिर शुरू हुआ संघर्ष
पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। करीब दो महीने तक चली शांति के बाद ईरान और इजराइल के बीच फिर से सैन्य टकराव शुरू हो गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल और हवाई हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
इस नए संघर्ष ने दुनिया के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह लड़ाई केवल ईरान और इजराइल तक सीमित रहेगी या फिर अमेरिका भी सीधे तौर पर इसमें शामिल होगा।
ईरान ने दागीं 30 बैलिस्टिक मिसाइलें
रविवार रात ईरान की ओर से इजराइल पर 30 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने इस हमले की जिम्मेदारी ली।
ईरान का कहना है कि यह हमला बेरूत में इजराइल की कार्रवाई के जवाब में किया गया है। आईआरजीसी ने दावा किया कि यह केवल एक चेतावनी है और अगर इजराइल या अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो उसका जवाब पहले से कहीं अधिक विनाशकारी होगा।
ईरान के मुताबिक, उसने इजराइल के हाइफा शहर में स्थित एक महत्वपूर्ण केमिकल प्लांट को निशाना बनाया। यह हमला इजराइल द्वारा ईरानी पेट्रोकेमिकल प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों के जवाब में किया गया।
इजराइल ने किया ताबड़तोड़ पलटवार
ईरान के हमले के कुछ ही घंटों बाद इजराइली वायुसेना सक्रिय हो गई। इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया।
इजराइली सेना का दावा है कि उसने उन स्थानों पर हमला किया जहां ऐसी मिसाइलें और हथियार मौजूद थे, जो इजराइली लड़ाकू विमानों के लिए खतरा बन सकते थे।
इजराइल ने दो चरणों में अपनी कार्रवाई को अंजाम दिया। पहले चरण में एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने का प्रयास किया गया, जबकि दूसरे चरण में पेट्रोकेमिकल और मिसाइल निर्माण से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इजराइली सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य भविष्य में इजराइल पर होने वाले संभावित हमलों को रोकना है।
तेहरान, तबरीज और अन्य शहरों में गूंजे धमाके
इजराइली हमलों के बाद ईरान के कई शहरों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। राजधानी तेहरान के अलावा तबरीज और साहन जैसे इलाकों में भी धमाकों की खबरें सामने आईं।
इन हमलों के बाद ईरान ने एहतियात के तौर पर अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इसके साथ ही पड़ोसी देशों इराक और सीरिया ने भी अपने एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला लिया।
इस कदम का मकसद किसी बड़े हवाई हादसे या क्षेत्रीय संकट से बचना बताया गया।
अमेरिकी सेना भी हुई सक्रिय
संघर्ष के बीच अमेरिका की सैन्य गतिविधियां भी बढ़ती दिखाई दीं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के दो ड्रोन मार गिराए हैं।
अमेरिका के अनुसार ये ड्रोन होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। इसलिए उन्हें नष्ट करना जरूरी था।
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
युद्ध विराम टूटने का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजराइल पर युद्ध विराम तोड़ने का आरोप लगाया है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि तनाव कम करने के बजाय दोनों देश अपनी सैन्य गतिविधियों से पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रहे हैं। ईरान का कहना है कि अगर दुश्मन अपनी कार्रवाई दोहराता है तो जवाब पहले से कहीं ज्यादा कठोर होगा।
दूसरी ओर इजराइल का दावा है कि उसकी कार्रवाई केवल आत्मरक्षा के लिए है और वह अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजराइल को सीधी चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि ईरान ने न तो युद्ध का मैदान छोड़ा है और न ही बातचीत का रास्ता बंद किया है। लेकिन अगर देश की सुरक्षा और अधिकारों को खतरा हुआ तो ईरान पूरी ताकत के साथ जवाब देगा।
राष्ट्रपति ने साफ कहा कि उनका देश किसी भी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है।
पहली बार दिखाई दिया नया पैटर्न
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार संघर्ष का तरीका पहले से अलग दिखाई दे रहा है।
पहले अक्सर इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान जवाबी हमला करता था, लेकिन इस बार ईरान ने पहले सीधे मिसाइल हमला किया।
इस बदलाव को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच तनाव अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गंभीर हो चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के हमले ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को राजनीतिक रूप से फायदा पहुंचाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू लंबे समय से कठोर रुख अपनाने के पक्ष में रहे हैं। इजराइली सेना का एक बड़ा वर्ग भी युद्ध विराम के खिलाफ माना जाता रहा है।
ऐसे में ईरान का हमला नेतन्याहू को अपने समर्थकों के सामने मजबूत नेता के रूप में पेश करने का अवसर दे सकता है।
उनके लिए यह संदेश देना आसान हो गया है कि जब तक ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को बनाया निशाना
इजराइली सेना का कहना है कि उसने उन स्थानों को निशाना बनाया जो ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं।
इजराइल का दावा है कि इन ठिकानों पर ऐसे उपकरण और सामग्री तैयार की जाती थी जिनका उपयोग मिसाइल और अन्य हथियारों के निर्माण में किया जाता है।
सेना के अनुसार इन ठिकानों को नष्ट करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी था।
ट्रंप ने संभाला मोर्चा
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी सक्रिय हो गए।
उन्होंने कहा कि इजराइल और ईरान दोनों ही युद्ध विराम चाहते हैं और शांति स्थापित करने के लिए बातचीत जारी है।
ट्रंप ने कहा कि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए प्रयास तेजी से चल रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही कोई सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही या गलत फैसला शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।
नेतन्याहू से फोन पर हुई बातचीत
रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की।
इस दौरान उन्होंने सलाह दी कि फिलहाल ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई से बचा जाए और हालात को और ज्यादा खराब होने से रोका जाए।
इजराइली मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया कि अमेरिका के अनुरोध के बाद इजराइल ने नए हमलों को फिलहाल रोक दिया।
हिजबुल्ला को भी दी गई चेतावनी
इजराइल ने साफ कर दिया है कि अगर लेबनान का संगठन हिजबुल्ला इजराइली शहरों पर हमले जारी रखता है तो बेरूत के दक्षिणी इलाकों को फिर से निशाना बनाया जा सकता है।
इस चेतावनी ने लेबनान में भी चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हिजबुल्ला सक्रिय हुआ तो यह संघर्ष केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को अपनी चपेट में ले सकता है।
क्या अमेरिका सीधे युद्ध में शामिल होगा?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या अमेरिका केवल मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा या फिर सीधे सैन्य कार्रवाई भी करेगा।
अब तक अमेरिका ने खुद को सीधे युद्ध से दूर रखने की कोशिश की है, लेकिन अमेरिकी सेना की बढ़ती गतिविधियां और ईरानी ड्रोन को मार गिराने जैसी घटनाएं संकेत देती हैं कि हालात तेजी से बदल सकते हैं।
अगर आने वाले दिनों में किसी अमेरिकी सैन्य ठिकाने या सहयोगी देश पर हमला होता है, तो अमेरिका के लिए सीधे हस्तक्षेप से बचना मुश्किल हो सकता है।
अगले कुछ घंटे क्यों हैं बेहद अहम?
हालांकि फिलहाल दोनों देशों की ओर से हमले रुकते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो जवाब और ज्यादा विनाशकारी होगा। वहीं इजराइल ने भी अपनी सुरक्षा से समझौता न करने की बात कही है।
ऐसे में अगले कुछ घंटे और दिन पूरे पश्चिम एशिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत और कूटनीति के जरिए हालात को संभाला जा सकेगा या फिर यह संघर्ष एक और बड़े युद्ध का रूप ले लेगा।





