दिल्ली में आज शुरू हुई नई पहल
भारत में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी दिल्ली में एथेनॉल पेट्रोल पंप की शुरुआत की गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शाम 6 बजे दिल्ली के पूसा रोड स्थित इस विशेष ईंधन स्टेशन का उद्घाटन किया।
यह लॉन्चिंग ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। ऐसे माहौल में एथेनॉल जैसे स्वदेशी और अपेक्षाकृत सस्ते ईंधन को भविष्य के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
देश में पहली बार एथेनॉल आधारित ईंधन को मिलेगा बड़ा विस्तार
सरकार पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। अब अगला कदम फ्लेक्स फ्यूल वाहनों और उनके लिए अलग ईंधन स्टेशनों का नेटवर्क तैयार करना है।
दिल्ली में शुरू हुआ यह एथेनॉल पेट्रोल पंप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में देश के अलग-अलग शहरों में भी ऐसे स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे एथेनॉल आधारित वाहनों को आसानी से ईंधन उपलब्ध हो सकेगा।
Maruti Suzuki ने पेश की देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार

एथेनॉल पेट्रोल पंप की शुरुआत के साथ ही देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki ने भी अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार पेश कर दी है। कंपनी ने Wagon R फ्लेक्स फ्यूल मॉडल को लॉन्च किया है, जो E85 से लेकर 100 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रण पर चलने में सक्षम है।
यह कार भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है। अब तक देश में अधिकतर वाहन पेट्रोल और डीजल पर निर्भर थे, लेकिन फ्लेक्स फ्यूल तकनीक के जरिए ईंधन के कई विकल्प उपलब्ध होंगे।
क्या होती है फ्लेक्स फ्यूल तकनीक?
फ्लेक्स फ्यूल तकनीक ऐसी प्रणाली है जिसमें वाहन का इंजन अलग-अलग अनुपात में पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर काम कर सकता है। इसका मतलब यह है कि वाहन चालक को केवल एक प्रकार के ईंधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
E85 ईंधन में 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। वहीं कुछ फ्लेक्स फ्यूल वाहन 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकते हैं। इसके लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम में विशेष बदलाव किए जाते हैं ताकि वाहन बेहतर प्रदर्शन कर सके।
क्यों बढ़ रही है एथेनॉल की मांग?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा खर्च केवल तेल आयात पर होता है। यदि देश में एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ता है तो आयातित तेल पर निर्भरता कम हो सकती है।
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भी आम लोगों के लिए चिंता का विषय रही हैं। एथेनॉल अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन है और इसका उत्पादन देश में ही किया जाता है। यही कारण है कि सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने बताया सरकार का रोडमैप
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार इस वर्ष के अंत तक देश में लगभग 500 फ्लेक्स फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में 50 से 100 स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। दिसंबर 2026 तक इनकी संख्या बढ़ाकर लगभग 500 की जाएगी।
इसके बाद जैसे-जैसे फ्लेक्स फ्यूल वाहन बाजार में बढ़ेंगे, दिसंबर 2027 तक देश में करीब 5000 डिस्पेंसिंग स्टेशन शुरू करने की योजना है।
नितिन गडकरी ने बताया प्रदूषण कम करने का उपाय
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण आज देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बन चुका है।
उनके अनुसार किसी भी आधुनिक समाज के लिए अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और नैतिकता तीन महत्वपूर्ण स्तंभ होते हैं। यदि देश को स्वच्छ और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ना है तो प्रदूषण को कम करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल आधारित वाहन वायु प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Maruti Suzuki के एमडी और सीईओ ने क्या कहा?
Maruti Suzuki के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि फ्लेक्स फ्यूल Wagon R केवल एक नई कार नहीं है, बल्कि यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि भारत के सामने दो प्रमुख लक्ष्य हैं। पहला, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और दूसरा, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना। फ्लेक्स फ्यूल तकनीक इन दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकती है।
उनका मानना है कि इस तकनीक का लाभ केवल ऑटोमोबाइल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा।
एथेनॉल आखिर बनता कैसे है?
एथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है।
भारत में गन्ने का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इसी वजह से एथेनॉल उत्पादन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। चीनी मिलें और डिस्टिलरी यूनिट्स इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सरकार लगातार किसानों और उद्योगों को प्रोत्साहन देकर एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
एथेनॉल कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। गन्ने और अनाज की मांग बढ़ने से किसानों को अपनी फसलों का बेहतर दाम मिल सकता है।
इसके अलावा अतिरिक्त उत्पादन की समस्या से भी राहत मिलेगी। अभी कई बार चीनी उत्पादन अधिक होने के कारण बाजार में कीमतें प्रभावित होती हैं, लेकिन एथेनॉल निर्माण के जरिए इस अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग किया जा सकेगा।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। देश की कुल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आने वाले कच्चे तेल से पूरा किया जाता है।
यदि एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग बढ़ता है तो विदेशी तेल पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो सकती है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा।
पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ा एथेनॉल का महत्व
हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में कई बार तनाव की स्थिति देखने को मिली है। ऐसे हालात में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वृद्धि होती है और इसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देशों पर पड़ता है।
इसी कारण सरकार ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर जोर दे रही है। एथेनॉल इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभर रहा है।
E85 ईंधन क्या है?
E85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
यह ईंधन फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया जाता है। कुछ आधुनिक इंजन 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी चल सकते हैं।
E85 का उपयोग ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में पहले से किया जा रहा है और अब भारत भी इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
दुनिया के कई देशों में पहले से सफल है यह मॉडल
ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल आधारित ईंधन उपयोग करने वाला देश माना जाता है। वहां बड़ी संख्या में वाहन फ्लेक्स फ्यूल तकनीक पर चलते हैं।
अमेरिका में भी लाखों वाहन E85 ईंधन का उपयोग करते हैं। इन देशों के अनुभव को देखते हुए भारत भी इस मॉडल को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कृषि संसाधनों की उपलब्धता के कारण एथेनॉल कार्यक्रम को और अधिक सफलता मिल सकती है।
पर्यावरण के लिए क्यों फायदेमंद है एथेनॉल?
पेट्रोल और डीजल की तुलना में एथेनॉल से कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इसके इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी एथेनॉल आधारित ईंधन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
आने वाले वर्षों में बदल सकता है भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की तस्वीर बदल सकती है।
जैसे-जैसे एथेनॉल स्टेशन बढ़ेंगे और कंपनियां नई फ्लेक्स फ्यूल कारें लॉन्च करेंगी, वैसे-वैसे उपभोक्ताओं के लिए नए विकल्प उपलब्ध होंगे।
Maruti Suzuki की शुरुआत के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपने मॉडल पेश कर सकती हैं।
2047 के विकसित भारत मिशन में निभा सकता है अहम रोल
भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता, स्वच्छ पर्यावरण और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव की आवश्यकता है।
एथेनॉल आधारित ईंधन और फ्लेक्स फ्यूल वाहन इन लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
अगले दो वर्षों में 5000 फ्लेक्स फ्यूल स्टेशन का लक्ष्य
सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2026 के अंत तक देश में लगभग 500 फ्लेक्स फ्यूल स्टेशन शुरू हो जाएंगे। इसके बाद 2027 के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर 5000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
यदि यह योजना सफल होती है तो भारत में एथेनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी और देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा सकेगा।






