प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना क्या है?
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना देश के पारंपरिक कारीगरों और छोटे काम-धंधे से जुड़े लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और व्यवसाय बढ़ाने के लिए सस्ता लोन उपलब्ध कराना है, जो अपने हुनर के दम पर रोजगार कर रहे हैं।
सरकार चाहती है कि छोटे स्तर पर काम करने वाले कारीगर और श्रमिक भी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाएं और आत्मनिर्भर बनें। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस योजना में कई प्रकार के लाभ दिए जा रहे हैं।
योजना के तहत कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें प्रशिक्षण, दैनिक भत्ता, टूलकिट सहायता और बिना गारंटी का लोन शामिल है।
योजना के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- ₹3 लाख तक का लोन
- ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता
- प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन
- बिना गारंटी का लोन
- कम ब्याज दर पर ऋण
- व्यवसाय बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण
₹500 प्रतिदिन कैसे मिलते हैं?

इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान सरकार की ओर से प्रतिदिन ₹500 की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
जब किसी व्यक्ति का आवेदन स्वीकृत हो जाता है, तब उसे प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित रहने वाले लाभार्थियों को प्रतिदिन ₹500 दिए जाते हैं।
यदि कोई व्यक्ति 20 दिनों तक प्रशिक्षण लेता है, तो उसे कुल ₹10,000 तक की राशि प्राप्त हो सकती है।
यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
प्रशिक्षण में क्या सिखाया जाता है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत दो प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं।
बेसिक ट्रेनिंग
सबसे पहले 5 से 7 दिनों की बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है। यह लगभग 40 घंटे की होती है।
एडवांस ट्रेनिंग
इसके बाद जरूरत के अनुसार 15 दिनों का अतिरिक्त प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
प्रशिक्षण में लाभार्थी के कार्यक्षेत्र से जुड़ी जानकारी दी जाती है। उदाहरण के लिए यदि किसी ने दर्जी के रूप में आवेदन किया है, तो उसे सिलाई, कपड़ों की कटिंग, आधुनिक मशीनों के उपयोग और व्यवसाय बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसी प्रकार अन्य व्यवसायों से जुड़े लोगों को उनके कार्य से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाती है।
₹15,000 की टूलकिट सहायता क्या है?
योजना के तहत सरकार लाभार्थियों को टूलकिट खरीदने के लिए ₹15,000 की आर्थिक सहायता भी देती है।
यह राशि वापस नहीं करनी होती। इसे अनुदान या सब्सिडी कहा जाता है।
यदि कोई व्यक्ति दर्जी का कार्य करता है, तो वह इस राशि का उपयोग सिलाई मशीन खरीदने में कर सकता है। इसी प्रकार अन्य कारीगर अपने काम के लिए जरूरी उपकरण खरीद सकते हैं।

इस सहायता का उद्देश्य लाभार्थियों को बेहतर उपकरण उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक मजबूत बना सकें।
कुल ₹25,000 तक की सहायता कैसे मिलती है?
यदि कोई व्यक्ति प्रशिक्षण पूरा करता है, तो उसे दो प्रकार का लाभ मिलता है।
पहला लाभ प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली दैनिक सहायता राशि है।
मान लीजिए किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण अवधि में ₹10,000 प्राप्त होते हैं।
दूसरा लाभ ₹15,000 की टूलकिट सहायता है।
इस प्रकार कुल मिलाकर व्यक्ति को ₹25,000 तक का लाभ प्राप्त हो सकता है।
यह राशि पूरी तरह सहायता के रूप में दी जाती है और इसे वापस नहीं करना होता।
₹3 लाख का लोन कैसे मिलता है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का सबसे बड़ा लाभ ₹3 लाख तक का लोन है।
यह लोन दो चरणों में दिया जाता है।
पहला चरण
पहले चरण में लाभार्थी को ₹1 लाख तक का लोन दिया जाता है।
यह लोन 18 महीने की अवधि के लिए उपलब्ध कराया जाता है।
दूसरा चरण
यदि लाभार्थी पहले चरण का लोन समय पर चुका देता है, तो उसे दूसरे चरण में ₹2 लाख तक का अतिरिक्त लोन दिया जाता है।
यह लोन 30 महीने की अवधि के लिए दिया जाता है।
इस प्रकार कुल मिलाकर लाभार्थी ₹3 लाख तक का ऋण प्राप्त कर सकता है।
क्या लोन के लिए गारंटी देनी होगी?
नहीं।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत मिलने वाला लोन कोलैटरल फ्री होता है।
इसका मतलब है कि लाभार्थी को कोई जमीन, मकान या अन्य संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती।
सरकार बिना गारंटी के यह लोन उपलब्ध कराती है ताकि छोटे कारीगर भी आसानी से इसका लाभ उठा सकें।
लोन पर ब्याज कितना लगता है?
योजना के तहत लोन पर सामान्य रूप से लगभग 8 प्रतिशत ब्याज लागू होता है।
हालांकि सरकार द्वारा 3 प्रतिशत तक की ब्याज सहायता भी दी जाती है।
इस कारण लाभार्थी को प्रभावी रूप से लगभग 5 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है।

यह बाजार में मिलने वाले सामान्य बिजनेस लोन की तुलना में काफी सस्ता माना जाता है।
अगर केवल ₹25,000 का लाभ चाहिए तो क्या करें?
कई लोगों का सवाल होता है कि यदि उन्हें केवल प्रशिक्षण और टूलकिट सहायता चाहिए तथा लोन नहीं लेना है, तो क्या यह संभव है?
इसका उत्तर है हां।
यदि कोई व्यक्ति प्रशिक्षण पूरा कर लेता है और बाद में लोन नहीं लेना चाहता, तो वह केवल प्रशिक्षण भत्ता और टूलकिट सहायता का लाभ प्राप्त कर सकता है।
लोन लेना पूरी तरह लाभार्थी की इच्छा पर निर्भर करता है।
अगर प्रशिक्षण नहीं करना चाहते तो क्या होगा?
कुछ लोग प्रशिक्षण में भाग नहीं लेना चाहते।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति को प्रशिक्षण से मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिलेंगी।
अर्थात:
- ₹500 प्रतिदिन का लाभ नहीं मिलेगा
- ₹15,000 की टूलकिट सहायता नहीं मिलेगी
लेकिन योजना की शर्तों के अनुसार वह लोन के लिए पात्र हो सकता है और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करके ऋण प्राप्त कर सकता है।
योजना का लाभ कौन ले सकता है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लाभ मुख्य रूप से पारंपरिक कारीगरों और छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों को दिया जाता है।
इसमें विभिन्न प्रकार के कार्य करने वाले लोग शामिल हो सकते हैं जैसे:
- दर्जी
- बढ़ई
- लोहार
- कुम्हार
- सुनार
- राजमिस्त्री
- मोची
- नाई
- अन्य पारंपरिक कारीगर
जो लोग अपने कौशल के आधार पर रोजगार करते हैं, वे इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
किन लोगों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
कुछ श्रेणियों के लोग इस योजना के लिए पात्र नहीं होते।
आमतौर पर निम्न लोग योजना का लाभ नहीं ले सकते:
- बड़े व्यवसायी
- बड़े उद्योग संचालक
- सरकारी कर्मचारी
- एक ही परिवार के कई सदस्य
योजना का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को सहायता देना है।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
योजना में आवेदन करने के लिए अधिक दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती।
मुख्य दस्तावेज इस प्रकार हैं:
- आधार कार्ड
- बैंक खाता
- मोबाइल नंबर
- वोटर आईडी (जहां आवश्यक हो)
- अन्य आवश्यक पहचान दस्तावेज
आधार आधारित सत्यापन के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाती है।
आवेदन प्रक्रिया क्या है?
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है।
हालांकि वर्तमान में अधिकांश आवेदनों के लिए कॉमन सर्विस सेंटर यानी CSC की सहायता ली जाती है।
आवेदन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
- नजदीकी CSC सेंटर पर जाएं।
- आवश्यक दस्तावेज साथ लेकर जाएं।
- आवेदन फॉर्म भरवाएं।
- आधार सत्यापन कराएं।
- व्यवसाय संबंधी जानकारी दें।
- आवेदन जमा करें।
- आवेदन की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने दें।
आवेदन स्वीकृत होने के बाद क्या होता है?
जब आपका आवेदन सफलतापूर्वक जमा हो जाता है, तब संबंधित विभाग द्वारा उसका सत्यापन किया जाता है।
इसके बाद आवेदन जिला या ब्लॉक स्तर पर भेजा जाता है।
सत्यापन पूरा होने पर लाभार्थी को प्रशिक्षण के लिए बुलाया जा सकता है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद टूलकिट सहायता और अन्य लाभ प्रदान किए जाते हैं।
जरूरत पड़ने पर लोन प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाती है।
नजदीकी CSC सेंटर से ही क्यों करना पड़ता है आवेदन?
वर्तमान व्यवस्था में योजना का आवेदन CSC ऑपरेटर के माध्यम से किया जाता है।
CSC ऑपरेटर के पास विशेष लॉगिन और अधिकृत पहुंच होती है जिसके माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाती है।
इसी कारण अधिकांश लोग स्वयं आवेदन नहीं कर सकते और उन्हें नजदीकी CSC केंद्र की सहायता लेनी पड़ती है।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
देश में लाखों लोग ऐसे हैं जो अपने पारंपरिक हुनर के आधार पर जीवनयापन करते हैं। लेकिन पूंजी की कमी और आधुनिक उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण वे अपने व्यवसाय को आगे नहीं बढ़ा पाते।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ऐसे लोगों के लिए एक बड़ा अवसर है। प्रशिक्षण, टूलकिट सहायता और सस्ते ऋण की मदद से कारीगर अपने काम को आधुनिक बना सकते हैं, आय बढ़ा सकते हैं और नए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।
यही कारण है कि यह योजना देश के लाखों छोटे कारीगरों और श्रमिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।






