दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव! अब GPA से नहीं चलेगा काम, पूरी रजिस्ट्री होगी जरूरी

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By: Abhishek Bansal

On: Friday, July 10, 2026 5:25 PM

दिल्ली में घर, फ्लैट या दुकान खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में केवल जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के आधार पर प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करना आसान नहीं रहेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब अधिकतर मामलों में पूरी कानूनी रजिस्ट्री करानी होगी। इस फैसले का उद्देश्य प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जीवाड़े, डबल सेलिंग, टैक्स चोरी और मालिकाना हक के विवादों पर रोक लगाना है।

यह फैसला लाखों लोगों को प्रभावित करेगा क्योंकि दिल्ली की बड़ी संख्या में अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में लंबे समय से जीपीए के माध्यम से संपत्ति की खरीद-बिक्री होती रही है।

मुख्य जानकारीविवरण
नया नियमGPA के जरिए प्रॉपर्टी बिक्री पर सख्ती
लागू क्षेत्रदिल्ली की अनऑथराइज्ड कॉलोनियां
उद्देश्यटैक्स चोरी रोकना, धोखाधड़ी कम करना
क्या जरूरी होगापूरी कानूनी रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी
असरखरीदार और विक्रेता दोनों पर

क्या है नया नियम?

दिल्ली सरकार ने सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि अब जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) से जुड़े सभी दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जाएगी। यदि किसी GPA का इस्तेमाल वास्तव में संपत्ति बेचने के लिए किया जा रहा है तो उसे सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी नहीं माना जाएगा।

ऐसे मामलों में पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क देना अनिवार्य होगा। बिना आवश्यक शुल्क जमा किए GPA का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इससे प्रॉपर्टी बाजार अधिक पारदर्शी बनेगा और भविष्य में कानूनी विवाद कम होंगे।

पहले कैसे होती थी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री?

दिल्ली की अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में वर्षों से लोग पूरी रजिस्ट्री कराने के बजाय GPA के माध्यम से संपत्ति खरीदते और बेचते रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा कारण कम खर्च था।

यदि किसी फ्लैट की कीमत 25 लाख रुपये होती थी तो उसकी पूरी रजिस्ट्री कराने में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क के रूप में काफी पैसा खर्च होता था। वहीं GPA के जरिए यह प्रक्रिया बहुत कम खर्च में पूरी हो जाती थी।

इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग इस विकल्प को अपनाते थे।

सरकार ने सख्ती क्यों की?

सरकार का कहना है कि GPA व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया जा रहा था।

मुख्य कारण इस प्रकार हैं—

  • स्टांप ड्यूटी की चोरी
  • टैक्स में भारी नुकसान
  • एक ही प्रॉपर्टी की कई लोगों को बिक्री
  • फर्जी दस्तावेज तैयार करना
  • मालिकाना हक को लेकर विवाद
  • कोर्ट में लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे

सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा था और आम लोगों को भी कानूनी सुरक्षा नहीं मिल रही थी।

अब हर GPA की होगी गहन जांच

नए नियम के अनुसार सब-रजिस्ट्रार केवल दस्तावेज स्वीकार नहीं करेंगे बल्कि उसकी पूरी जांच भी करेंगे।

जांच के दौरान निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—

  • क्या दस्तावेज में संपत्ति बेचने का उल्लेख है?
  • क्या पैसों के लेन-देन का जिक्र किया गया है?
  • क्या प्रॉपर्टी का कब्जा दूसरे व्यक्ति को दिया जा रहा है?
  • क्या GPA स्थायी है या सीमित अवधि की?
  • क्या संपत्ति को बेचने का अधिकार दिया गया है?
  • क्या गिफ्ट, ट्रांसफर या गिरवी रखने की अनुमति दी गई है?

यदि इन बिंदुओं में प्रॉपर्टी बिक्री से जुड़े संकेत मिलते हैं तो मामला आगे जांच के लिए भेजा जाएगा।

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किन लोगों को मिलेगी छूट?

सरकार ने करीबी रिश्तेदारों के मामलों में कुछ राहत दी है।

यदि GPA निम्न रिश्तेदारों के बीच है तो सामान्य प्रक्रिया अपनाई जा सकती है—

  • माता-पिता
  • पति-पत्नी
  • बेटा-बेटी
  • भाई-बहन

इन रिश्तों के अलावा यदि कोई अन्य व्यक्ति GPA के माध्यम से अधिकार प्राप्त करता है तो दस्तावेज की अतिरिक्त जांच की जाएगी।

कलेक्टर ऑफ स्टांप की क्या होगी भूमिका?

अब ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय कलेक्टर ऑफ स्टांप करेगा।

यदि सब-रजिस्ट्रार को किसी GPA पर संदेह होता है तो वह दस्तावेज सीधे कलेक्टर के पास भेज देगा।

कलेक्टर यह तय करेगा कि—

  • दस्तावेज केवल अधिकार देने के लिए है।
  • या फिर वास्तव में संपत्ति बेचने के उद्देश्य से बनाया गया है।

यदि यह बिक्री से जुड़ा पाया गया तो पूरी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना होगा।

कितने समय में होगा फैसला?

सरकार ने समय सीमा भी तय कर दी है।

प्रक्रियासमय सीमा
प्रारंभिक जांचसब-रजिस्ट्रार द्वारा
कलेक्टर का फैसला30 दिन
विशेष परिस्थितियों मेंअधिकतम 3 महीने
अतिरिक्त समयलिखित कारण बताना जरूरी

इससे मामलों का जल्द निपटारा होने की उम्मीद है।

सब-रजिस्ट्रार पर भी होगी कार्रवाई

सरकार ने अधिकारियों के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं।

यदि कोई सब-रजिस्ट्रार नियमों की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से GPA रजिस्टर करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

इसका उद्देश्य पूरे सिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

प्रॉपर्टी खरीदने वालों को क्या फायदा होगा?

हालांकि शुरुआती दौर में लोगों का खर्च बढ़ सकता है लेकिन लंबे समय में इसके कई फायदे बताए जा रहे हैं।

मालिकाना हक रहेगा स्पष्ट

पूरी रजिस्ट्री होने से संपत्ति का कानूनी मालिक स्पष्ट रहेगा।

डबल सेलिंग रुकेगी

पहले एक ही प्रॉपर्टी कई लोगों को बेचने की शिकायतें सामने आती थीं। अब ऐसी घटनाओं पर रोक लगने की संभावना है।

कोर्ट के विवाद कम होंगे

स्पष्ट दस्तावेज होने से भविष्य में कानूनी विवाद कम हो सकते हैं।

बैंक लोन लेने में सुविधा

कानूनी रूप से रजिस्टर्ड संपत्ति पर बैंक से ऋण लेना भी आसान होता है।

सरकारी रिकॉर्ड रहेगा साफ

हर संपत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद कम होगा।

लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

इन इलाकों में अधिकांश प्रॉपर्टी सौदे GPA के माध्यम से ही होते थे।

अब लोगों को—

  • पूरी रजिस्ट्री करानी होगी।
  • स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
  • कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • दस्तावेजों की जांच का इंतजार करना पड़ सकता है।

इससे खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पहले की तुलना में थोड़ी लंबी और महंगी हो सकती है।

अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में क्यों ज्यादा असर?

दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसी कॉलोनियां हैं जहां बिना अधिकृत नक्शे और योजना के मकान बने।

इन क्षेत्रों में कई वर्षों तक संपत्ति की खरीद-बिक्री GPA के माध्यम से होती रही क्योंकि—

  • प्रक्रिया आसान थी।
  • खर्च कम था।
  • जल्दी काम हो जाता था।
  • रजिस्ट्री शुल्क से बचाव हो जाता था।

लेकिन इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई लोगों ने फर्जी सौदे भी किए।

टैक्स चोरी पर लगेगी रोक

सरकार का मानना है कि इस फैसले से सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

पहले लोग वास्तविक कीमत की बजाय कम मूल्य दिखाकर या GPA के माध्यम से खरीद-बिक्री करके स्टांप ड्यूटी बचा लेते थे।

अब यदि दस्तावेज वास्तव में बिक्री से जुड़ा होगा तो पूरी स्टांप ड्यूटी जमा करनी होगी।

इससे टैक्स चोरी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

भूमाफियाओं पर कैसे पड़ेगा असर?

सरकार के अनुसार इस फैसले से भूमाफियाओं की गतिविधियों पर भी असर पड़ेगा।

पहले कुछ लोग GPA के जरिए—

  • अवैध प्लॉट बेचते थे।
  • एक ही जमीन कई लोगों को बेच देते थे।
  • नकली दस्तावेज तैयार करते थे।
  • बाद में खरीदारों को कानूनी विवादों में फंसा देते थे।

अब हर दस्तावेज की जांच होने से ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

खरीदारों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

यदि आप दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।

  • केवल GPA देखकर संपत्ति न खरीदें।
  • रजिस्ट्री की स्थिति जरूर जांचें।
  • सभी दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं।
  • स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की जानकारी पहले लें।
  • विक्रेता के मालिकाना हक की पुष्टि करें।
  • सरकारी रिकॉर्ड का मिलान अवश्य करें।
  • जल्दबाजी में कोई भुगतान न करें।

नए नियम से क्या बदलेगा?

नए नियम के लागू होने के बाद प्रॉपर्टी बाजार में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

पहले की व्यवस्थानई व्यवस्था
GPA से आसानी से बिक्रीपूरी जांच के बाद ही प्रक्रिया
कम खर्चस्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री जरूरी
टैक्स चोरी की संभावनाटैक्स वसूली में पारदर्शिता
डबल सेलिंग का खतराकानूनी सुरक्षा अधिक
मालिकाना विवादस्पष्ट रिकॉर्ड और रजिस्ट्री
सीमित दस्तावेज जांचहर दस्तावेज की विस्तृत जांच

सरकार का उद्देश्य क्या है?

दिल्ली सरकार का कहना है कि यह कदम केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि आम नागरिकों के हित में भी उठाया गया है।

सरकार चाहती है कि प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो ताकि खरीदार को भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके साथ ही स्टांप ड्यूटी की चोरी रुके, फर्जीवाड़ा कम हो, भूमाफियाओं पर कार्रवाई आसान बने और दिल्ली का प्रॉपर्टी बाजार अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित हो सके।

Abhishek Bansal

Abhishek Bansal TajaTimes.com के पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। वे टेक्नोलॉजी, लाइफस्टाइल, मनोरंजन और ट्रेंडिंग खबरों पर सरल, सटीक और विश्वसनीय लेख लिखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक उपयोगी और ताज़ा जानकारी पहुंचाना है

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