अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया के जरिए भी खुली चेतावनियों और धमकियों का दौर जारी है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के नेताओं तथा उनके करीबी सहयोगियों की ओर से किए गए पोस्ट दुनिया भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी बीच अमेरिका की संसद में भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है, जिसने पूरे मामले को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है।
सोशल मीडिया पर शुरू हुआ धमकियों का नया दौर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगियों की ओर से सोशल मीडिया पर ऐसे संकेत दिए गए हैं, जिन्हें ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है। एक पोस्ट में रेत की घड़ी यानी टाइमर दिखाया गया, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ईरान के पास समझौते के लिए समय तेजी से खत्म हो रहा है।
इस पोस्ट को कई विशेषज्ञों ने अमेरिका की तरफ से एक अप्रत्यक्ष धमकी माना। उनका मानना है कि अमेरिका यह संकेत देना चाहता है कि अगर ईरान समय रहते बातचीत के रास्ते पर नहीं आता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान ने भी दिया कड़ा जवाब
अमेरिका की इस चेतावनी के बाद ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने भी सोशल मीडिया के जरिए जवाब दिया। उन्होंने खैबर शिकन मिसाइल का वीडियो और तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि आने वाले समय में दुनिया बहुत कुछ देखने वाली है।
ईरानी नेताओं का यह संदेश साफ तौर पर अमेरिका को जवाब माना जा रहा है। ईरान लगातार यह जताने की कोशिश कर रहा है कि वह किसी भी परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का जवाब देने में सक्षम है।
क्या है खैबर शिकन मिसाइल की ताकत ?
खैबर शिकन मिसाइल ईरान की सबसे आधुनिक और खतरनाक मिसाइलों में से एक मानी जाती है। यह एक सॉलिड फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे बहुत कम समय में लॉन्च किया जा सकता है।
इसकी मारक क्षमता लगभग 1450 से 1500 किलोमीटर तक बताई जाती है। इस दूरी के अंदर आने वाले कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने इसके निशाने पर आ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इराक, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों तक इस मिसाइल की पहुंच संभव है।
पहले भी दिखाई जा चुकी है ताकत
यह पहला मौका नहीं है जब ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता का प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी अमेरिका की ओर से बी-2 बॉम्बर्स के वीडियो और तस्वीरें साझा की गई थीं। जवाब में ईरान ने मिसाइल लॉन्च के वीडियो जारी कर यह संदेश दिया था कि अगर अमेरिका बमबारी करेगा तो ईरान भी जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।
दोनों देशों के बीच इस तरह की बयानबाजी और शक्ति प्रदर्शन लगातार जारी है, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ रही चिंता
अगर दोनों देशों के बीच यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक व्यापार तक कई क्षेत्रों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
मध्य पूर्व में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में पूरा क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।
वाशिंगटन में ट्रंप के खिलाफ बढ़ा विरोध
इसी बीच अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी से एक और बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध संबंधी अधिकारों को सीमित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया है।
यह प्रस्ताव 215 बनाम 208 वोटों से पारित हुआ। खास बात यह रही कि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ दिया।
इस घटनाक्रम ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
क्या ट्रंप के हाथ बांध दिए गए हैं?
संसद में पारित इस प्रस्ताव का उद्देश्य राष्ट्रपति के एकतरफा सैन्य फैसलों पर नियंत्रण स्थापित करना है। इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप भविष्य में ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने से पहले संसद की मंजूरी लेने के लिए बाध्य हो सकते हैं।
हालांकि यह मामला इतना आसान नहीं है।
ट्रंप के पास मौजूद है वीटो पावर
अमेरिकी राष्ट्रपति के पास वीटो पावर होती है। इसके जरिए वह संसद द्वारा पारित प्रस्ताव को खारिज कर सकते हैं। अगर ट्रंप इस प्रस्ताव को मानने से इनकार करते हैं तो संसद को दोबारा भारी बहुमत के साथ इसे लागू कराने की कोशिश करनी होगी।
जानकारों के अनुसार इसके लिए लगभग 290 वोटों की जरूरत पड़ सकती है।
चार रिपब्लिकन सांसदों का विरोध क्यों महत्वपूर्ण है?
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा रिपब्लिकन पार्टी के उन चार सांसदों की हो रही है जिन्होंने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ मतदान किया।
यह संकेत है कि ट्रंप की पार्टी के भीतर भी ईरान नीति को लेकर मतभेद मौजूद हैं।
कुछ सांसदों का मानना है कि बिना संसद की मंजूरी के किसी बड़े युद्ध में शामिल होना अमेरिका के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
क्या ईरान के साथ युद्ध की संभावना बढ़ रही है?
हालांकि अभी दोनों देशों के बीच सीधे युद्ध की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन जिस तरह से बयानबाजी और सैन्य ताकत का प्रदर्शन हो रहा है, उसने दुनिया की चिंताओं को बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो आने वाले समय में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान पर
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा यह टकराव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। सोशल मीडिया पर चल रही धमकियां, मिसाइलों के वीडियो और राजनीतिक उठापटक ने इस पूरे विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश बातचीत का रास्ता अपनाते हैं या फिर तनाव और ज्यादा बढ़ता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जिनका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

