अमेरिका में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
अमेरिका में भारतीय मूल के अपराध नेटवर्क के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने एक विशेष अभियान चलाते हुए लॉरेंस बिश्नोई गैंग और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कसा है। इस अभियान का नाम ऑपरेशन हार्ड वॉल रखा गया है। इस ऑपरेशन के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में एक साथ छापेमारी की गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार 7 जुलाई को हुई इस कार्रवाई में कम से कम 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों ने कई स्थानों से हथियार, ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित सामान भी बरामद किया है।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क भारत से बाहर भी तेजी से फैलने की खबरें सामने आती रही हैं। अब अमेरिकी एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क पर सीधा हमला बोला है।
ऑपरेशन हार्ड वॉल क्या है?
एफबीआई द्वारा चलाया गया ऑपरेशन हार्ड वॉल एक विशेष अंतरराष्ट्रीय अभियान है, जिसका उद्देश्य संगठित अपराध, अवैध हथियारों की तस्करी, ड्रग्स नेटवर्क और रंगदारी वसूली जैसे अपराधों में शामिल गिरोहों को खत्म करना है।
इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिका की कई संघीय एजेंसियों ने मिलकर कार्रवाई की। जांच एजेंसियों ने पहले कई महीनों तक संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी। इसके बाद एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी कर आरोपियों को हिरासत में लिया गया।
बताया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान अमेरिका, कनाडा और यूरोप में लगभग 50 से अधिक स्थानों पर रेड की गई। अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज, हथियार, नकदी, ड्रग्स और अन्य संदिग्ध सामान जब्त किया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों की भी तलाश कर रही हैं।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क को बनाया गया निशाना
एफबीआई की कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य लॉरेंस बिश्नोई गैंग और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ना था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क में कई ऐसे लोग शामिल हैं जो अलग-अलग देशों में रहकर अपराधों को अंजाम दे रहे थे।

जांच में सामने आया है कि इस गैंग के सदस्य केवल भारत तक सीमित नहीं हैं बल्कि अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भी सक्रिय हैं। ये लोग अलग-अलग देशों में रहकर आपस में संपर्क बनाए रखते हैं और अपराधों की योजना तैयार करते हैं।
एफबीआई का मानना है कि यदि इस नेटवर्क को समय रहते नहीं रोका जाता तो यह आने वाले समय में और अधिक खतरनाक साबित हो सकता था।
गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े नेटवर्क की भी जांच
इस कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसियों ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अलावा उसके करीबी सहयोगियों से जुड़े नेटवर्क पर भी फोकस किया। इनमें गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े लोगों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इन नेटवर्क के जरिए कई देशों में आपराधिक गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन गिरोहों को आर्थिक मदद कहां से मिल रही थी और इनके संपर्क किन-किन देशों तक फैले हुए हैं।
छापेमारी में हथियार और ड्रग्स बरामद
एफबीआई द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान कई स्थानों से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित सामान भी जब्त किया गया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि बरामद किए गए सामान की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। इसके आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि इन हथियारों और ड्रग्स का इस्तेमाल कहां किया जाना था और इनके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
अमेरिका, कनाडा और यूरोप में फैला नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नेटवर्क अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में इसके सदस्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में सक्रिय हुए हैं।
बताया जाता है कि कई आरोपी अवैध तरीके से इन देशों में रह रहे हैं और वहीं से अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। वे इंटरनेट, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया के जरिए अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए रखते हैं।
यही कारण है कि इस बार एफबीआई ने केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि कई देशों की एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त कार्रवाई की।
भारतीय समुदाय को बनाया जा रहा था निशाना
जांच एजेंसियों के अनुसार विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों को भी यह गैंग लगातार निशाना बना रहा था।
सूत्रों के मुताबिक कारोबारियों, व्यापारियों और अन्य संपन्न लोगों को फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से धमकियां दी जाती थीं। उनसे रंगदारी की मांग की जाती थी और रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती थी।
ऐसी शिकायतें विशेष रूप से कनाडा और अमेरिका में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के लोगों की ओर से सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद जांच एजेंसियों ने पूरे नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई।
रंगदारी और संगठित अपराध पर एजेंसियों की नजर
एफबीआई और अन्य एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल रंगदारी तक सीमित नहीं था। इसके जरिए अवैध हथियारों की सप्लाई, ड्रग्स तस्करी और अन्य संगठित अपराधों को भी बढ़ावा दिया जा रहा था।
जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी रकम अलग-अलग देशों में भेजी गई और किन लोगों को इसका फायदा पहुंचाया गया।
बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच से कई नए खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बढ़ा सहयोग
इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कई देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर कार्रवाई की।
अमेरिका की एफबीआई के साथ स्थानीय पुलिस, संघीय एजेंसियां और अन्य सुरक्षा संस्थानों ने संयुक्त अभियान चलाया। कनाडा और यूरोप की संबंधित एजेंसियों ने भी संदिग्ध स्थानों पर छापेमारी में सहयोग किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के लिए इसी तरह की संयुक्त कार्रवाई बेहद जरूरी होती है क्योंकि ऐसे नेटवर्क कई देशों में फैले होते हैं।
जांच अभी जारी, सामने आ सकते हैं और बड़े खुलासे
हालांकि इस अभियान में 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, लेकिन जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है।
बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इसके आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जा रहा था और इसके तार किन-किन देशों तक जुड़े हुए हैं।











