CBSE ने जारी किए तीन भाषा नीति के नए दिशा-निर्देश
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने तीन भाषा नीति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पिछले कुछ समय से इस बात को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी कि क्या बोर्ड अपनी भाषा नीति में कोई बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब CBSE ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट कर दी है। बोर्ड ने बताया है कि नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि छात्रों और स्कूलों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
नई गाइडलाइन में यह भी साफ कर दिया गया है कि सभी छात्रों पर एक साथ नए नियम लागू नहीं होंगे। अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग व्यवस्था तय की गई है।
मौजूदा कक्षा 10 के छात्रों पर नहीं होगा कोई असर
CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों के लिए किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। वे पहले की तरह ही अपने मौजूदा पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली के अनुसार बोर्ड परीक्षा देंगे।
इसका मतलब है कि जो विद्यार्थी इस समय दसवीं में हैं, उन्हें नई तीन भाषा नीति के कारण किसी अतिरिक्त परीक्षा या नए नियम का पालन नहीं करना होगा।
कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों के लिए क्या हैं नए नियम?
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो छात्र अभी कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे हैं, उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी।

इन छात्रों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा। यानी स्कूल अपने स्तर पर परीक्षा या आंतरिक मूल्यांकन करेंगे और इसके लिए अलग से CBSE बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।
इस फैसले से उन छात्रों को राहत मिलेगी जो पहले से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं और अचानक नए परीक्षा नियम लागू होने की आशंका से चिंतित थे।
कक्षा 6 से लागू होगी नई व्यवस्था
नई तीन भाषा नीति का सबसे बड़ा बदलाव कक्षा 6 से शुरू होने वाले छात्रों के लिए होगा।
CBSE के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों को तीन भाषा नीति के तहत पढ़ाई करनी होगी। यह व्यवस्था आगे उनकी पूरी स्कूली शिक्षा के दौरान लागू रहेगी।
यानी जो छात्र इस नई व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से पढ़ाई शुरू करेंगे, वही आगे चलकर नई परीक्षा प्रणाली का हिस्सा बनेंगे।
तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाएं होंगी अनिवार्य
नई नीति के अनुसार छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
इनमें से दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य हैं। तीसरी भाषा के रूप में विदेशी भाषा का विकल्प रखा गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और छात्रों को अपनी भाषाई विरासत से जोड़ना है। साथ ही विदेशी भाषा सीखने का अवसर भी छात्रों को मिलेगा, जिससे उनकी वैश्विक स्तर पर भाषा संबंधी क्षमता मजबूत हो सके।
कक्षा 9 में भी लागू रहेगा यही नियम
CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 9 में पहुंचने के बाद भी छात्रों को तीन भाषा नीति के तहत ही पढ़ाई करनी होगी।
यानी कक्षा 6 से शुरू हुई भाषा व्यवस्था कक्षा 9 तक जारी रहेगी। हालांकि, वर्तमान में जो छात्र पहले से कक्षा 9 में पढ़ रहे हैं, वे नई बोर्ड परीक्षा व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।
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तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा किसे देनी होगी?
नई गाइडलाइन का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा को लेकर है।

CBSE के अनुसार, केवल वे छात्र जो नई नीति के तहत कक्षा 6 से पढ़ाई शुरू करेंगे, उन्हें कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
इसके विपरीत, जो छात्र फिलहाल कक्षा 7, 8 या 9 में हैं, उन्हें दसवीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। उनके लिए केवल स्कूल आधारित मूल्यांकन ही मान्य रहेगा।
इस तरह बोर्ड ने पुराने और नए बैच के छात्रों के बीच स्पष्ट अंतर तय कर दिया है।
किन छात्रों को मिलेगी विशेष छूट?
CBSE ने कुछ विशेष श्रेणियों के छात्रों को इस नई व्यवस्था से छूट भी प्रदान की है।
इनमें शामिल हैं—
- दिव्यांग छात्र।
- विदेशों में स्थित CBSE से संबद्ध स्कूलों के विद्यार्थी।
- कुछ विदेशी छात्र।
इन छात्रों के लिए भाषा संबंधी नियमों में आवश्यक लचीलापन रखा गया है, ताकि उनकी शैक्षणिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई जारी रह सके।
लगातार चल रही अटकलों पर CBSE ने दी स्पष्टता
पिछले कई दिनों से यह चर्चा चल रही थी कि CBSE अपने पहले जारी किए गए सर्कुलर में बदलाव कर सकता है। कई अभिभावकों, छात्रों और स्कूलों के बीच यह भ्रम भी था कि क्या सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा अनिवार्य कर दी जाएगी।
अब नए दिशा-निर्देश जारी होने के बाद बोर्ड ने इन सभी सवालों का जवाब दे दिया है। नई गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि बदलाव केवल नए बैच के छात्रों पर लागू होंगे और पहले से पढ़ रहे छात्रों को किसी अतिरिक्त बोर्ड परीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
स्कूलों को भी दिए गए स्पष्ट निर्देश
CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे नई भाषा नीति के अनुसार अपनी शैक्षणिक योजना तैयार करें। जिन कक्षाओं पर नई व्यवस्था लागू होगी, वहां तीन भाषा नीति का पालन सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही स्कूलों को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर किया जाएगा और इसके लिए अलग से बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं होगी।
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छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर
नई गाइडलाइन के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चल रही कई तरह की आशंकाएं दूर हो गई हैं। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि नई तीन भाषा नीति को एकदम से लागू नहीं किया जाएगा, बल्कि चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
इससे मौजूदा छात्रों की पढ़ाई पर कोई अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि नए छात्रों को शुरुआत से ही नई भाषा व्यवस्था के अनुसार शिक्षा दी जाएगी। इससे स्कूलों को भी नई नीति को लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।






